बदकिस्मत नौकर – Akbar Birbal story in Hindi with moral

Akbar Birbal story in Hindi with moral – हेलो दोस्त आज में आपके लिए एक ओर अकबर बीरबल के कहानी लेके आया हु। यह कहानी एक बदकिस्मत नौकर की है जो राजा अकबर के दरबार में काम करता था तो चलिए ये कहानी को पढ़ते है।

बदकिस्मत नौकर - Akbar Birbal story in Hindi with moral

बदकिस्मत नौकर | Akbar Birbal Story in Hindi

एक दिन की बात है, बड़े सवेरे दो सैनिक आपस में ब्बतें कर रहे थे ।

तभी दोनों में से एक सैनिक की नज़र एक बूढ़े नौकर की तरफ पड़ी जो बगीचे में फूल पौधों को पानी दे रहा था ।

फिर उसने दूसरे सैनिक से पूछा: वो कौन कौन है जो इतनी सुबह पौधों को पानी दे रहा है ?

दूसरे सैनिक ने बोला: ये तोह है वो मनहूस भीकू, सारा दिन गधे की तरह काम करता रहता है फिर भी गलियां खता रहता है ।

तभी दूसरा सैनिक बोलता है: ऐ उसकी तरफ मत देखो , कही उसकी शकल देखली तोह सारा दिन हमें भी गलियां खानी पड़ेंगी ।

फिर वो लोग वहां से जाने लगते हैं ।

फिर सैनिक दूसरे सैनिक से बोलता है: भीकू इतना मनहूस है, तोह शहेंशा उसे निकल क्यों नहीं देते?

तभी दूसरा सैनिक बोलता है: शहेंशा कभी ऐसा नहीं करेंगे, वो एक नेक दिल बादशाह हैं और वो गरीब की रोज़ी रोटी कभी नहीं छीनेंगे ।

दूसरा सैनिक: हाँ ये तोह सच है, हमारे शहेंशा जैसा रहें दिल इंसान पूरी दुनिया में नहीं मिलेगा ।

और वो दोनों सैनिक वहां से चले जाते हैं ।

तभी सुबह सुबह महाराज अकबर की नींद खुलती है, और वो जाग जाते हैं,और अपनी पानी की कलश की ओर पानी पिने के लिए बढ़ते हैं ।

लेकिन कलश में पानी ख़तम हो चूका होता है।

फिर महाराज पुकारते हैं: कोई है यहाँ पर, पानी लेकर आओ ।

तभी उन दोनों सैनिकों को महाराज की आवाज़ सुनाई देती है, फिर उनमे से एक सैनिक बोलता है: सुना तुमने, शहेंशा पानी मंगवा रहे हैं ।

दूसरा सैनिक: औ हाँ मैं जल्दी किसी नौकर को पानी लेकर भेजता हूँ।

फिर दूसरा सैनिक किसी नौकर की तलाश में चला जाता है जो महाराज को पानी पीला सके।

तभी महाराज पानी पानी कहकर चैखने लगते हैं, और बड़े गुस्से में बोलते हैं: कोई है जो मुझे पानी देगा।

तभी पहला सैनिक खुद बा खुद बोलता है: शहेंशा पानी मांग रहे हैं और देने वाला कोई नहीं ।

तभी दूसरा सैनिक आकर बोलता है: यहाँ तोह कोई नहीं है ।

फिर दोनों सैनिक रसोई में जाकर किसी इंसान को ढूंढ़ने लगे जो महाराज को पानी पीला सके ।

महाराज अब और भी ज़ोर ज़ोर से पानी पानी कहकर चीखने लगे बड़े गुस्से में: तभी महाराज अकबर की आवाज़ भीकू सुन लेता है ।

महाराज अकबर कहते हैं: अरे कहाँ मर गए सारे लोग, पानी लाकर दो मुझे ।

और खुदसे बोलता है: शहेंशा पानी मांग रहे हैं और कोई देने वाला नहीं है, कोई दिखाई नहीं दे रहा , मैं खुद ही जाकर शहेंशा को पानी पीला देता हूँ ।

महाराज अकबर कहते हैं: अरे कहाँ मर गए सारे लोग, पानी लाकर दो मुझे ।

तभी महाराज अकबर के पास भीकू पानी लेकर उपस्थित होता है ।

और कहता है हुज़ूर ये रहा पानी ।

महाराज कहते हैं: भीकू तुम?

भीकू बोलता है: जी हुज़ूर, आसपास कोई नहीं था और आप काफी देर से पानी के लिए आवाज़ें दे रहे थे ।

महाराज बोलते हैं: मनहूस चेहरा, वो भी सुबह सुभाउ, अब पूरा दिन कहीं ख़राब न जाये ।

भीकू महाराज की बात सुनकर दुखी होकर बोलता है: जी हुज़ूर ।

फिर महाराज भीकू के लाये हुए पानी को पी लेते हैं, तभी महाराज के पेट में दर्द चालू हो जाता है ।

महाराज के हाथों से पानी का गिलास गिर जाता है जिसमे भीकू पानी लाया था, महाराज के पानी पिने के बाद ।

महाराज के पेट में बोहोत ज़्यादा दर्द होने लगता है, भीकू डरे हुए स्वाभाव से बोलता है: क्या हुआ हुज़ूर ।

तभी वहां दोनों सैनिक एक आदमी को लेकर पहुँचते हैं जिसके पास पानी होता है, और वो लोग पूछते हैं: क्या हुआ शहेंशा को?

फिर पानी लेकर आया आदमी बोलता है: दिखाई नहीं देता, उनकी तबीयतर ख़राब है और ये मनहूस भीकू यहाँ क्या कर रहा है? इसकी वजह से ही शहेंशा की तबियत ख़राब हुई है ।

तभी दोनों सैनिक भीकू को धक्के मार कर वहां से निकाल देते हैं ।

तभी एक सैनिक पानी लेकर आये आदमी से बोलता है: जल्द से हाकिम साब को बुलाओ ।

महाराज अकबर पेट दर्द के मारे बिस्तर में लोट पॉट होने लगते हैं और बिस्तर से गिर जाते हैं जिससे उनके पैरों में मोच आ जाती है ।

महाराज मेरा पेअर मेरा पेअर कहकर चीखने लगते हैं और बेहोश हो जाते हैं ।

महारानी पूछती हैं क्या?

दासी: शहेंशा ने सुबह सुबह भीकू का चेहरा देख लिया ।

महारानी: शहेंशा ठीक तोह है ना ?

दासी: ये कैसे मुमकिन हो सकता है?

महारानी: हाकिम साब को बुलाने कोई गया है या नहीं?उसके पिलाये पानी से शहेंशा के पेट में दर्द चालू हो गया, वो बिस्तर से गिर पड़े और उनके पैरों में मोच आ गयी ।

दासी: हाँ वो महाराज का इलाज कर रहे हैं, बस उप्पर वाले से गुज़ारश है की शहेंशा ठीक हो जाएँ ।

महारानी दासी से कहती है चलो चलें महाराज के पास ।

महाराज अपने बिस्तर पर आराम कर रहे होते हैं और उनके पेअर पर पट्टी बंधी होती है जब महारानी उनके पास पहुँचती हैं ।

महारानी महाराज से: अब कैसी तबियत है आपकी?

महाराज अकबर: दवाई से थोड़ी राहत महसूस कर रहा हूँ ।

महारानी: अब आप सिर्फ आराम कीजिये ।

महाराज अकबर: शहेंशा को आराम कहाँ महारानी । मेरे दरबार में नजाने ऐसे बहोत काम अधूरे रह जाएंगे ।

महारानी: आप ज़िद क्यों कर रहे हैं?

महाराज अकबर: ये ज़िद नहीं फ़र्ज़ है । शहेंशा सोया रहेगा तोह मुल्क कैसे तरक्की करेगा ?

शहेंशा अपने दरबार में विराजमान होते हैं ।

और दरबारी शहेंशा सलामत रहे कहकर आने लगते हैं दरबार में ।

दरबार में बीरबल भी उपस्थित रहते हैं ।

महाराज दरबारियों से: सबसे पहले बताएं, mangolia से मंगाई भेड़ें पहुंची या नहीं?

दरबारी: नहीं जहाँपना, चीन के व्यापारियों ने वो भेड़ें हमसे दुगनी कीमत में खरीद ली हैं ।

महाराज: हम्म, बघियों के बारे में हमारे जासूस क्या खबर लेकर आये हैं?

जासूस: खबर तोह अच्छी नहीं है हुज़ूर, बाघी हमारी फौजों पे हमला कर सकते हैं ।

तभी ये बात सुनकर दरबार में उपस्थित सभी लोग डर से जाते हैं ।

तभी एक और दरबारी आ जाता है: सेहेंशा सलामत रहे कहकर आता है दरबार में ।

महाराज दरबारी से: रेहमान, क्या खबर लेकर आये हो?

दरबारी: खबर तोह अच्छी नहीं है हुज़ूर, राजस्थान के रेगिस्तान में हमारी फ़ौज को हार का मुँह देखना पड़ा और हमारे बोहोत से योद्धा भी मारे गए ।

सभी ये बात सुनकर चौक जाते हैं ।

तभी और एक दरबारी आता है और कहता है: एक बोहोत बुरी खबर लाया हु हुज़ूर ।

दरबारी: आपका सबसे पसंदीदा घोडा, रुस्तम चल बसा हुज़ूर ।

महाराज अकबर: रुस्तम चल बसा?

दरबारी: जी हुज़ूर रुस्तम चल बसा । और ये कहकर वह दरबारी रोने लगता है ।

महाराज अकबर मन ही मन बोलते हैं: कैसा मनहूस दिन है, एक भी अच्छी खबर नहीं आयी, क्या ये सब उस मनहूस भीकू के वजह से तोह नहीं जिसकी शकल मैंने सुबह देखि थी ?

एक दरबारी: वजह फरमाते हैं हुज़ूर, सुबह सुबह उसकी शकल देखने के बाद चरों तरफ से बुरी खबरें आ रही है।

तभी और एक दरबारी बोलता है : उसी की वजह से हमें मंगोलीअ के भेड़ें नहीं मिली ।

जासूस: और बघियों ने फिर से बगावत शुरू की ।

फिर महाराज को गुस्सा आने लगा ।

दूसरा दरबारी: हमारी फ़ौज जो दुश्मनो के चने चबाती थी उसे भी हार का सामना करना पड़ा ।

महाराज का गुस्सा बढ़ने लगा ।

दरबारी: रुस्तम भी आपका साथ छोड़ गया हुज़ूर ।

दूसरा दरबारी: हो ना हो ये सब उसी मनहूस भीकू की वजह से हो रहा है ।

महाराज गुस्से से लाल हो गए थे ।

तभी एक दरबारी बोलता है: इससे पहले हमपे और आफतें आये उसे फांसी दीजिये ।

ये बात सुनकर बीरबल चौक जाते हैं, की भाई ये क्या बोल रहा है ।

फिर सभी मौजूद दरबारी बोलने लगे: हाँ हुज़ूर उसे फांसी देदो, फांसी देदो कहकर उसके फांसी की मांग करने लगे ।

महाराज बोलते हैं गुस्से में: ठीक है कल सुबह सूरज निकलने से पहले भीकू को फांसी पे लटका दिया जायेगा ।

ये सुनकर बीरबल चौक से जाते हैं, बीरबल को महाराज का ये फैसला अच्छा नहीं लगता, बीरबल के चेहरे पे ये बात झलक रही थी ।

सभी दरबारी भीकू की फांसी की मांग कर रहे थे बीरबल को छोड़ कर । बीरबल दुखी चेहरा लेकर खड़े थे ।

तभी महाराज बीरबल से पूछते हैं: बीरबल, लगता है तुम हमारे फैसले से खुश नहीं हो ।

बीरबल बोलते हैं: नहीं हुज़ूर आपका फैसला सराखों पर ।

बीरबल: लेकिन मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

महाराज अकबर: ज़रूर कहो ।

बीरबल: आपको मंगोलीअ की भेड़ें नहीं मिली तोह इसमें भीकू का क्या कुसूर हुज़ूर ?

बीरबल: बाघी तोह अक्सर सर उठाते रहते हैं हुज़ूर-ऐ-बाला, भीकू उसके लिए कुसूरवार कैसे?

फिर महारज सोचने लगते हैं ।

बीरबल: जहाँ तक राजस्थान में हमारी फ़ौज का सवाल है, तोह लड़ाई के मैदान में हार जीत तोह होती ही है हुज़ूर=ऐ=बाला ।

बीरबल: हमने बोहोत से लड़ाइयां जीती हैं लेकिन जो हरी हैं उसके लिए भीकू को कुसूरवार नहीं ठहराया जाया सकता ।

फिर महाराज सोचते हुए बीरबल की ओर देखते हैं ।

बीरबल: आपके पसंदीदा घोड़े रुस्तम की मौत का ग़म जितना गम आपको है उतना हमें भी है, लेकिन ज़रा सोचिये, वो बूढ़ा हो चूका था, आज नहीं तोह कल उसे जाना ही था ।

बीरबल: और रहा सवाल आपके पेट के दर्द का हुज़ूर-ऐ-बाला तोह इसमें बेचारे भीकू का क्या कुसूर, वो तोह पानी पिलाकर आपकी सेवा कर रहा था ।

बीरबल: मेरे ख्याल से आपके पेट में दर्द कल रात शाही दावत में ज़्यादा खाने के वजह से हुआ है ।

बीरबल: आप सावधानी बरतते तोह, आप और यहाँ मौजूद सभी दरबारी भीकू को मनहूस मानते हैं, लेकिन भीकू के लिये तोह सबसे बड़े मनहूस आप ही हैं हुज़ूर-ऐ-बाला ।

ये बात सुनकर महाराज अकबर बीरबल की तरफ ठोस गुस्से वाली नज़र से देखने लगे और दरबार में मौजूद लोग भी गुस्से से देखने लगे ।

बीरबल: आपका कहना है की आपने सुबह सुबह भीकू का चेहरा देखा, तोह उसने भी तोह सुबह सुबह आपका चेहरा देखा, आप तोह शहेंशा हैं ज़िंदा रहेंगे, लेकिन भीकू, वो बेचारा आपको पानी पिलाने के जुर्म में लटका दिया जायेगा ।

बीरबल: ज़रा सोचिये ये कैसा इंसाफ है जहाँपना ।

महाराज अकबर: बीरबल ! तुमने हमारी आँखें खोल दी, हमें अन्धविश्वास के जाल में फंसने से बचा लिया, तुम ना होते हम एक बेकसूर को फांसी देकर बहोत बड़ा जुर्म कर बैठते, हम भीकू की सजा वापिस लेते हैं ।

महाराज अकबर: बीरबल ! तुमने हमारी आँखें खोल दी, हमें अन्धविश्वास के जाल में फंसने से बचा लिया, तुम ना होते हम एक बेकसूर को फांसी देकर बहोत बड़ा जुर्म कर बैठते, हम भीकू की सजा वापिस लेते हैं, और ये हुकुम देते हैं की अगर आईन्दा कोई भी अगर भीकू को मनहूस कहता हुआ पाया गया तोह उसे भरे चौराहे पर 100 कोड़े मारे जायेंगे ।

महाराज की ये बात सुनकर बीरबल को अच्छा लगा और उसके दिल को राहत मिलती है ।

सभी दरबारियों के चेहरे उतर जाते हैं ।

दूसरे दिन सुबह सुबह भीकू बीरबल के घर के बहार दरवाज़ा खटखटा के चुप जाता है ।

बीरबल: कौन है कहकर पुकारते हैं ।

भीकू: मैं हूँ हुज़ूर भीकू, चुप के बोलता है, ताकि बीरबल उनका चेहरा ना देख पाए ।

भीकू: मैं शुक्रिया अदा करने आया हूँ ।

बीरबल: भीकू सामने आओ, तुम्हारा चेहरा तोह देख लू सुबह सुबह और मुस्कुराते हुआ भीकू को गले लगा लेते हैं बीरबल ।

Moral of story - कोई भी काम करने से पहले दोनों पहलुओं को समझ लेना चाहिए । फिर फैसला लेना चाहिए सब को समझ कर ।

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