फारसी व्यापारी | Akbar Birbal story in Hindi written

फारसी व्यापारी | Akbar Birbal story in Hindi written

एक बार की बात ह राजा अकबर की दरबार म

मान सिंह: हुज़ूर, ईरान का एक व्यापारी आपसे मिलना चाहता है ।

राजा अकबर: ठीक ह मान सिंह जी। इजाज़त है।

दरबारियों ने आवाज़ लगते हुए ।

दरबारियों: शमशेर सिंह, दरबार में पेश हो ।

शमशेर सिंह दरबार की और बढ़ते हुए ।

शमशेर सिंह: आदाब हुज़ूर… ।

राजा अकबर: खुशामदीद, सुना ह आप ईरान से आये है आपको यह कैसा लग रहा है, उम्मीद है आपको यह आ कर अच्छा लग रहा होगा ।

शमशेर सिंह: माफ़ कीजियेगा हुज़ूर,मैं यह पहली बार आया हु आछा लग्ना तो दूर की बात यह आ कर मैं बर्बाद हो गया ।

राजा अकबर आश्चर्य से शमशेर सिंह से पूछने लगे ।

राजा अकबर: बर्बाद कैसे… क्या ? बताइये क्या समस्या है ?

शमशेर सिंह: हुज़ूर, मैं यह ईरान से कुछ सामान ला रहा था जिनकी कीमत ५०० सोने की अशर्फियाँ थी, कुछ शानदार कपडे और कुछ बेहद बेह्तरीन कारीगारी के नमूने ।

राजा अकबर पूछते हुए ।

राजा अकबर: तो इसमें समस्या क्या है। क्या आपको आपकी मनन चाही कीमत नहीं मिली रही ।

शमशेर सिंह: नहीं हुज़ूर,समस्या यह नहीं है जब मैं ईरान से आ रहा था भी एक हिंदुस्तानी व्यापारी से मुलाकात हुई जो ईरान से अपने सामान बेच कर वापिस हिंदुस्तान की और बढ़ रहा थे । उसने मुझे अपने गधो पर सामान लाँधने की इजाज़त दी ।

राजा अकबर: ठीक है, आगे बताइये ।

शमशेर सिंह:हुज़ूर,आगरा पहुंचने के बाद उसने मुझे मेरा सामान वापिस करने से इनकार कर दिया ये कहते हुए की सामान उसका है जो की उसने ईरान से हिंदुस्तान में व्यापर करने के लिए लाया गया है अब मेरे पास थोड़ा हे सामान है जिसे बेच कर हे मैं अपने घर वापिस जा सकूंगा ।

राजा अकबर: यह तोह बड़ी शर्म की बात है ।

राजा अकबर: हम इस मामले को ज़रूर सुलझायेंगे। बताइये कौन है वो आदमी क्या आप उसे जानते है ।

शमशेर सिंह: जी हुज़ूर , उसका नाम दिलावर है और मैं उसका पता जानता हु ।

राजा अकबर : सैनिको, फ़ौरन समशेर सिंह के बताय पते पर जाओ और दिलावर को यह लेकर आओ ।

दिलावर को अदालत में पेश करने के बाद ।

दिलावर: आदाब हुज़ूर ।

राजा अकबर: बताओ, क्या तुम इस इंसान को जाते हो ?

दिलावर: जी हुज़ूर, ये शमशेर सिंह है ईरान से ।

राजा अकबर: तोह तुम इसे जानते हो बताओ तुमने इसके साथ बेईमानी क्यू की ?

दिलावर: जी नहीं हुज़ूर, यह सच नहीं है मैंने कोई

बेईमानी नहीं की वह सामान मेरा अपना था। जब मैं ईरान से लौट रहा था तब ये मेरे पास आया और मेरे साथ हिंदुस्तान आने की गुज़ारिश की ये हिंदुस्तान देखना चाहता था और इसे रास्ता मालुम नहीं था मैं ईरान से सामान ले कर लौट हे रहा था तो मैंने सोचा क्यू नहीं ।

समशेर सिंह: जी नहीं हुज़ूर, इसने कहा था ये अपने सारे पैसे जुए में हार गया है इसके पास कोई भी सामान नहीं था और मुझे अपने गधे कम किराय पर देने लगा ये कहते हुए की आपकी भी मदत हो जयेगी और मुझे भी अपने घर जाने के लिए पैसे मिल जयँगे ।

दिलावर: नहीं, ये जरासर झूट है ।मैंने इसे बस अपने साथ सफर पे लिया था सामान मेरा अपना है जब हम आगरा पहुंचे तोह यह कहने लगा की सारे सामान इसके हो और मुझे धमकाने लगा की अगर मैंने इसे पैसे नहीं दिए तोह यह दरबार में मेरी झूठी शिकायत करेगा ।

राजा अकबर क्रोधित हो कर ।

राजा अकबर : बहुत हो चूका बस करो , शमशेर सिंह अगर वो सारा सामान आपका है तोह आप उस सामान को पहचान पींगे और अगर आप सामान को नहीं समझ पाए तोह दिलावर सच कह रहा है

समशेर सिंह: जी हां ।

दिलावर:(उसी वक़्त) नहीं हुज़ूर ।

राजा अकबर: क्या मतलब, तुम अपने सामान की पहचान क्यू नहीं करने देते ।

दिलावर: हुज़ूर, जब हम हिंदुस्तान की तरफ आ रहे थे तब शमशेर ने सामानो पर दिलचस्बी दिखाई और मैंने इसे अपना सारा सामान दिखाया था । इसे सामान पहचानने में तकलीफ नहीं होगी ।

शमशेर सिंह: जी नहीं हुज़ूर, इसने मेरे सामान पे दिलचस्बी दिखाई और मैंने इसे अपना सामान दिखा दिया ।

दिलावर:ये आदमी झूठ बोल रहा है। आप मेरे नौकर से पूछ सकते है वो मेरे साथ ही था और वो आपके सामने झूठ नहीं बोलेगा ।

शमशेर सिंह: जी नहीं हुज़ूर इसका नौकर भी इसके साथ मिला हुआ है वह भी झूट बोलेगा इसने उसे भी अपने साजिस में शामिल किया होगा। हुज़ूर मेरे पास इसके खिलाफ कोई भी साबुत नहीं है पर मैं सच कह रहा हु अब आप हे मेरी मदत कर सकते है ।

राजा अकबर सोच विचार करने के बाद ।

राजा अकबर : बीरबल, मेरे ख्याल से अब तुम्हे इस समस्या को सुलझा सकते हो और असली मुजरिम का पता लगा सकते हो ।

बीरबल: जी हुज़ूर, मुझे यकीन है की मई ये मामला जल्द से जल्द सुलझा लूंगा ।

राजा अकबर: तोह देर किस बात की है । मामला जल्द से जल्द सुलझाओ ।

बीरबल: जी जहापनाह, मुझे थोड़ा समय चाहिए १-२ दिनों में मुजरिम आपके सामने होगा मुझे पूरा यकीं है ।

राजा अकबर: ठीक है बीरबल अगर तुम्हे थोड़ा वक़्त चाहिए तोह फिर हम इंतज़ार करंगे,तब तक के लिए शमशेर सिंह आप हमारे मेहमान रहेंगे याद रखिये अगर आप मुजरिम साबित हुए तोह फिर आपको लम्बे समय के लिए यहां मेहमान बन कर रहना पड़ेगा कैद खाने में ।

शमशेर सिंह: मैं समझ सकता हु हुज़ूर ।

राजा अकबर: और रही बात दिलावर की तोह वह अभी सेहर के बहार नहीं जा सकते जब तक यह मामला सुलझ नहीं जाता ।

दिलावर :जैसी आपकी मर्ज़ी हुज़ूर । मुझे किसी चीज़ का डर नहीं माइए सिर्फ सच ही कहा है ।
राजा अकबर : हमे उम्मीद है की तुम पता लगा लोगे की इन दोनों में से मुजरिम कौन है ।

बीरबल: जी शुक्रिया जहापनाह मुझे यकीन है की एक या दो दिनों मैं मुजरिम को आपके सामने पेश कर सकूंगा ।

राजा अकबर दरबार से बहार जाते हुए ।

( अगले दिन )

राजा अकबर: कहा है बीरबल वो अब तक दरबार में नहीं पंहुचा ।

बीरबल दरबार की ओर बढ़ते हुए ।

बीरबल : आदाब जहापनाह … ।

राजा अकबर: कहा थे तुम क्या तुम्हे मुजरिम का कुछ पता चला ।

बीरबल: जी जहापनाह मुझे पता चल गया मुजरिम कौन है और मैं ये साबित भी कर सकता हु ।

राजा अकबर ख़ुशी से : ओह बहुत खूब साहबाश, तोह बीरबल बताओ की कौन झूठा है ।

बीरबल: जी जहापनाह दिलावर झूठ और बईमान भी ,शमशेर सिंह सच कह रहा है ।

राजा अकबर: (हैरान हो कर) दिलावर, हमे तो लगा था की दिलावर सच बोल रहा था उसके पास अपनी दुकान है तोह वो क्यू बेईमानी करेगा, क्या तुम्हे पूरा यकीन है ? तुम्हे पता कैसे चला ।

बीरबल: जहापनाह , कल शाम की बात है मैं और मान सिंह दिलावर की दुकान पर गए थे उसके नौकर (सुखीराम) को दुकान छोड़ जाते हुए देख कर हम चुप गए ओर उसका ढाबे तक पीछा किया

ढाबे पे जयपुर के व्यापारी, मित्र और ढाबे का मालिक एक दूसरे से बात कर रहे थे ।

ढाबे का मालिक: आइये बैठिये, आप पहली बार आगरा आये हो क्या ?

जयपुर का व्यापारी: जी सही कहा, हम पहली बार जयपुर से आगरा आये है । दर असल हम कुछ ईरानी कारीगरी का सामान लेने आये है वापिस जयपुर लेजा कर बेचने के लिए क्या आप बता सकते है की यह पर ईरानी की बेहरीन कारीगरी किसके पास मिलेगी ।
यह सुन कर सुखीराम उत्तेजित हो उठा ओर जयपुर के व्यापारी से बात करने लगा ।

दिलावर का नौकर (सुखीराम) : माफ़ कीजिये हुज़ूर मैंने आपको ईरानी कारीगरी के बारे में बात करते सुना ।

जयपुर का व्यापारी : क्या आप हमे कुछ ईरानी कारी के व्यापारी के बारे में बता सकते हो ।

दिलावर का नौकर (सुखीराम) : जी मेरा नाम सुखीराम है मैं एक बहु हे ाचे व्यापारी के साथ काम करता हु उनका नाम दिलावर है कुछ दिनों पहले ही उन्होंने ईरान से कुछ बेहतरीन कारीगरी लेकर लौटे है ।

जैयर का व्यापारी खुसी से : यह तोह बहुत अछि बात है, क्या आप वो सामान हमे अभी दिखा सकते है ।

सुखीराम : जी बिलकुल , चलिए मेरे साथ ।

सुखीराम, जयपुर के व्यापारी ओर उसके मित्र को अपने साथ सिल्वर की दुकान की तरफ बढ़ते हुए

दिलावर की दुकान पर पहुंचते ही सुखीराम जयपुर के व्यापारी ओर मित्र को कुछ क्षण रुकने को कहता है ।

सुखीराम: जनाब कुछ क्षण रुकिए अगर वो ज़्यादा व्यस्त नहीं होंगे तोह मैं आपको जल्द से जल्द उनसे मुलाकात करवाता हु ।

जयपुर का व्यापारी: ज़रूर ज़रूर ज़रा जल्दी कीजिये ।

सुखीराम दुकान के भीतर जाने के बाद

सुखीराम दिलावर से : जनाब मैं अभी अभी एक व्यापारी से मिला ढाबे पे उसे कुछ ईरानी कारीगरी की तलाश है और खरीदना चाहता है ।

दिलावर: बहुत खूब सुखीराम, कहा है वो ।

सुखीराम: मैंने उनको बहार रुकने को कहा है। आप कहे तोह मैं उन्हें भीतर बुलाऊ ।

दिलावर: ज़रूर, क्यू नहीं ।

सुखीराम जयपुर के व्यापारी और मित्र को ले कर भीतर जाता है ।

सुखीराम: पता चला है की आपके पास बेहद ही अछि कारीगरी है क्या हम उसे अभी देख सकते है ।

दिलावर: बिलकुल, सुखीराम सारा सामान लेकर आओ ।

जयपुर का व्यापारी और उसके मित्र सामानो को देख कर अपनी अपनी विचारों का आदान-प्रदान करने के बाद ।

जयपुर का व्यापारी: इन सभी सामने की आप कितनी दाम चाहते हो ।

दिलावर : आप सारा सामान खरीद लेंगे, हम आपको ये सारे सामान का मूल्य १००० सोने की अशर्फियाँ रखूँगा

जयपुर का व्यापारी: हमे नहीं लगता ये सारी सामान बेहतरीन किसम का है हम इन साड़ी सामानो की सिर्फ आधी कीमत दे सकते है सिर्फ ५०० सोने की अशर्फियाँ ।

दिलावर: आधी कीमत, (आश्चर्य से) ये आधी बेहरीन किसम का नहीं है ।

जयपुर का व्यापारी और उसके मित्र सामानो को बारीकी से परखने के बाद ।

जयपुर का व्यापारी: दरअसल मेरे दोस्त को इन चीज़ो में खराबी नज़र आ रहे है , अब हम इन सारी सामानो की सिर्फ ३०० सोने की अशर्फियाँ दे पायंगे । अब फैसला आपके ऊपर है ।

दिलावर: ठीक है ३०० अशर्फियाँ हे सही ।

जयपुर का व्यापारी : सौदा मंज़ूर है । कल की सुबह पैसो के साथ आ कर ये सारा सामान ले जायँगे ।

यह सारी कहानी बीरबल ने अकबर को बताई परन्तु इन सारी बातो को राजा अकबर समझ न सके ।

राजा अकबर: ज़रा समझाओ इन सारी बातो से ये कैसे साबित होगा की दिलावर झूठ बोल रहा है ।

बीरबल: जहापनाह, कोई भी व्यापारी अपने सामानो को इतनी जल्दी खामिया मंज़ूर नहीं करेगा ।

या फिर इतनी जल्दी काम कीमत लेने के लिए क्यू राज़ी होगा ,मैं तभी समझ गया की यह सामान दिलावर को नहीं है और इन सामानो की कोई भी कीमत लेने को तैयार है ।

राजा अकबर: (गहरायी से सोचते हुए) तुम ठीक कह रहे हो ।

बीरबल: जब मुझे यकीन हो गया की दिलावर झूठ बोल रहा है तब हमने दिलावर के नौकर को झूठ बोलने की सजा सुना कर डराया और उस से सच उगलवाई, अब वह दिलावर के खिलाफ गवाह देने के लिए तैयार है ।

सारी गवाही सुनने के बाद राजा अख़बार क्रोधित हो उठे ।

राजा अकबर : समशेर और दिलावर को पेश किया जाये ।

शमशेर सिंह और दिलावर को दरबार में पेश करने के बाद ।

राजा अकबर: ( दिलावर से ) तुमने एक सरीफ आदमी को, जिसने तुम्हारी मदत की धोखा देते हुए तुम्हे शर्म आनी चाहिए। हम तुम्हे साल भर कैद की सजा देते है और शमशेर सिंह को परेशां करने के लिए ५०० सोने की अशर्फियाँ जुर्माने की तौर पर अदा करनी पड़ेगी सिपाहियों दूर ले जाओ इसे हमारी नज़रो से ।

शमशेर सिंह: शुक्रिया हुज़ूर… ।

राजा अकबर: शुक्रियादा करो बीरबल को जिसने दिलावर की बैमानी अपने लाजवाब अंदाज़ से साबित की

दरबार में राजा अकबर की वह वही होने लगी ।

सेहेंशाह अकबर ज़िंदा बाद … ।

सेहेंशाह अकबर ज़िंदा बाद … ।

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