बीरबल की चतुराई के किस्से -birbal ki khichdi story

बीरबल की चतुराई के किस्से – आप सभी अकबर और बीरबल को जानते होंगे या उनकी कहानी पढ़ी या सुनी होगी। अकबर बीरबल की कहानियां इतनी जबरदस्त हैं कि उन्हें बताया नहीं जा सकता। तो इसीलिए आज के लेख में हम आपके लिए (birbal ki khichdi storyबीरबल की खिचड़ी की कहानी )लेकर आए हैं, तो चलिए शुरू करते हैं।

बीरबल की चतुराई के किस्से -birbal ki khichdi story

बीरबल की खिचड़ी

बीरबल अपनी बुद्धिमानी और चतुराई से बहुत नाम कमाया था। बीरबल की टिपण्णी और चुटकुले से राजा अकबर मनोरंजित हो जाते थे। अकबर, बीरबल की बुद्धिमानी और चतुराई से बहुत ही प्रसन्न थे।

एक बार अकबर और बीरबल तालाब किनारे बातें कर रहे थे । एक ठंडी हवा का झोंका उन दोनों के पास से गुजरता है। जैसे-जैसे हवा बढ़ती है वैसे-वैसे मौसम और भी ठंडा होने लगता है।

अकबर अपने हाथों को तालाब के पानी में डालते है और तुरंत ही बाहर निकाल लेते है। पानी इतना ठंडा हो चुका होता है कि उस पर हाथ भी नहीं रखा जा सकता था अचानक अकबर के दिमाग में एक विचार आ जाती है।

अकबर:- बीरबल क्या तुम्हें लगता है कि कोई भी आदमी पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है ?

बीरबल:- जी हुजूर एक आदमी पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है, अगर उसे पैसे की सख्त जरूरत हो।

अकबर इस बारे में फिर सोचते है।

अकबर:- मैं तुम्हारी बात से सहमत नहीं हूं, मुझे नहीं लगता कि कोई भी इंसान इस तालाब के ठंडे पानी में रात तक रह सकता है, चाहे उसे पैसे की कितनी भी जरूरत हो।

बीरबल:- पर हुजूर मैं बिना कोई कठिनाई के ऐसे आदमी को ढूंढ सकता हूं जो इस तालाब के पानी में पूरी रात रह सकता है।

अकबर:- ठीक है बीरबल।

बीरबल:- मैं आपसे शर्त लगा सकता हूं, अगर मैं कोई ऐसा इंसान ढूंढ लाऊ जो इस पानी में पूरी रात खड़ा रह सकता है तो क्या आप उसे 1000 सोने के मोहरे देंगे। मुझे एक हफ्ते का समय मिल सकता है।

अकबर:- ठीक है, मैं इस बात से सहमत हूं।

यह कहते हुए दोनों महल चले जाते हैं। अगले दिन से बीरबल उस इंसान की खोज शुरू कर देते है और दूर-दूर तक ढूंढने लगते है। बीरबल ढूंढता ढूंढता गांव की तरफ निकल पड़ते है और उसे एक आदमी अपनी झोपड़े के बाहर बैठा उदास दिखता है। बीरबल तुरंत ही उसके पास जाते है।

बीरबल:- इस तरह तुम इतने उदास क्यों बैठे हो ?

आदमी सिर उठाता है और बीरबल को देखता है।

गरीब आदमी:- मैं बहुत ही बड़ी परेशानी में हूं क्या आप मुझे सहायता कर सकते हैं। मेरी बेटी का विवाह अगले हफ्ते हैं और मुझे पैसों की सख्त जरूरत है, क्या आप मुझे पैसे दे सकते हैं ? मेरे पास ना की जमीन है और ना ही कोई मुझे पैसे देने को तैयार है।

ये कहते हुआ गरीब आदमी रोने लगता है। उस आदमी को रोता देख बीरबल को तरस आ जाता है और उसे महसूस होता है कि वह जिस आदमी को ढूंढ रहा था वह आदमी उसे मिल चुका है।

बीरबल:- मैं तुम्हे पैसे नहीं दे सकता पर सहायता जरूर कर सकता हूं। अगर तुम एक चुनौती मंजूर करते हो तो तुम अपनी मदद खुद कर सकते हो।

आदमी को एक उम्मीद की किरण दिखती है।

गरीब:- हां ठीक है मैं करूंगा।

बीरबल:- तुम्हें सहर किनारे एक तालाब में पूरी रात खड़े रहना है, ठंडे पानी में और वहां से 1 मिनट भी नहीं हिलना, अगर तुम यह करने में सक्षम हो जाते हो तो राजा तुम्हें 1000 सोने के सिक्के देंगे इनाम के तौर पर।

गरीब:- ठीक है हुजूर, मैं स्वीकार करता हूं। मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं उस तालाब के ठंडे पानी में, मैं रात भर खड़ा रहूंगा।

बीरबल उस आदमी को अपने साथ महल ले चलता है और उसे राजा अकबर के सामने प्रस्तुत करता है।

बीरबल:- हुजूर यह आदमी आपकी चुनौती स्वीकार करता है।

राजा अकबर उस आदमी को गौर से देखते है।

राजा अकबर:- अगर यह तैयार है तो इस आदमी को आज रात उस तालाब के ठंडे पानी में रात भर खड़े होने का मौका दिया जाए।

उस रात को गरीब आदमी तालाब के ठंडे पानी में अकेला बीच में खड़ा हो जाता है। अकबर अपने कुछ सैनिकों को उसके आस-पास खड़े होने को कहते हैं ताकि वह आदमी पैसे के लिए धोखा ना कर सके।

उस रात उस आदमी को तालाब के बीच में खड़े रहने को कहते है और तालाब के किनारे 2 सैनिक उसे पहरा दे रहे होते है। उस रात वह आदमी बिना अपनी जगह से हिला सारी रात गुजरता है।

अगली सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण दिखाई देती है उस वक़्त आदमी को तालाब से बाहर निकलने की इजाजत मिलती है। सैनिक उसे राजा अकबर के पास ले चलते हैं।

राजा अकबर:- सैनिकों, क्या यह आदमी तालाब से बाहर निकला था या नहीं ?

सैनिक:- नहीं हुजूर, ये आदमी एक पल के लिए भी उस तालाब के ठंडे पानी से बाहर नहीं निकला।

अकबर चौक जाते है और उस आदमी से पूछते है।

राजा अकबर:- तुमने उस ठंडे पानी में खड़े रह कर सारी रात कैसे बिता लिया।

गरीब:- मैं अपनी आंख वहां के पास वाले एक लालटेन पर गड़ा रखी थी जो तालाब के किनारे था। जब वह लालटेन चलता था तब मेरी ध्यान खींचता था। लालटेन जलता देख मैं तालाब के ठंडे पानी में रात भर रह पाया ओर तलब के बाहर नहीं निकला।

अकबर:- तुमने तालाब के ठंडे पानी मैं उस लालटे के जरिए गर्मी ली और उस ठंडे पानी में पूरी रात रह सके, ये तो नाइंसाफी है। तुमने गलत तरीकों से चुनौती जीती है अब तुम्हें कोई भी इनाम नहीं मिलेगा।

यह सुनकर गरीब आदमी चौक जाता है और वह तुरंत बीरबल के पास मदद के लिए जाता है।

बीरबल के पास वह गरीब आदमी रोता हुआ पहुंचता है और अकबर के दरबार में हुई सारी बात विस्तार में बताता है। बीरबल अकबर के नतीजे से ना खुश होते है। बीरबल कुछ देर सोचते है और उस आदमी से कहते है कि वह अपने घर लौट जाए वह जल्द ही इसका हल ढूंढ कर उसे उसके ईनाम के पैसे लौटा देंगे।

अगले दिन सुबह जब बीरबल अकबर की अदालत में नहीं आते तो अकबर को उसकी गैर मौजूदगी का अभ्यास होता है और सोचते है कि बीरबल अभी कहां होंगे।

अकबर अपने एक सैनिक को अकबर के घर जाकर पता लगाने को कहते है। कुछ देर बाद सैनिक समाचार ले कर आता है।

सैनिक:- महाराज, बीरबल खिचड़ी बनाने में व्यस्त है। बीरबल ने कहा है कि वह तभी आएंगे जब उनकी खिचड़ी तैयार हो जाएगी।

राजा अकबर, बीरबल का इंतजार करते करते एक पूरा दिन निकाल देते है।

अगली सुबह बीरबल अदालत में नहीं दिखते तो राजा अकबर सोचते हैं कि वह खुद बीरबल के घर जा कर देखें कि बीरबल अब तक क्या कर रहे हैं।

जब राजा अकबर बीरबल के घर पहुंचते हैं तो वह देखते हैं कि बीरबल अपने आंगन में आग लगा कर 5 फीट ऊपर एक मटके को गर्म करते देखते है। उस मटके में चावल, अनाज और पानी भरा हुआ होता है। अकबर और सैनिक बीरबल को देख हंस पड़ते हैं।

अकबर:- तुम्हें पता है बीरबल, तुम क्या कर रहे हो ?

बीरबल:- जहांपनाह, मैं खिचड़ी बना रहा हूं।

अकबर:- तुम्हारे साथ क्या गलत हुआ है बीरबल, क्या तुम्हे लगता है कि आप चावल की मटकी को आग से 5 फुट ऊपर लटकाकर खिचड़ी बन पाएंगे।

बीरबल:- जी हुजूर, अगर एक गरीब आदमी, दूर जल रहे टिमटिमाती हुई लालटेन से गर्मी ले सकता है तो मै भी आग के 5 फीट ऊपर मटका लटका कर खिचड़ी बना सकता है।

बीरबल की बातें सुन कर राजा अकबर को अपनी गलती का एहसास हो जाता है।

अकबर:- बीरबल, मै तुम्हारी बुद्धिमानी से एक बार फिर प्रसन्न हुआ। तुमने एक बार फिर से मदत की एक अच्छा निर्णय लेने में।

राजा अकबर गरीब आदमी को बुलाते है ओर उस 1000 सोने के सिक्के ईनाम के तौर पर देते है।

गरीब बहुत खुश होता है। गरीब राजा अकबर और बीरबल को शुक्रिया कर उन्हें अपनी बेटी की शादी में आमंत्रित करता है।


सोने के सिक्के या न्याय

एक बार अकबर की अदालत में ।

अकबर ने बीरबल से पूछा : ” मेरे प्रिय मित्र बीरबल अगर तुम्हे न्याय और सोने के सिक्को में किसी एक को चुनना पड़े तब तुम किसे चुनोगे ?”

बीरबल (बिना किसिस समय बर्बाद किये): “महाराज, मैं बिना किसी शक के सोने के सिक्के चुनता ।

यह सुन कर राजा अकबर सहित सभी लोग बीरबल के तत्काल उत्तर पर भौचक्का हो गए और उन्होंने सोचा कि इस बार बीरबल ने गाला फैसला ले लिया ।

राजा अकबर: मैं आप से बहुत निराश हुआ । न्याय के रूप में कम मूल्यवान कुछ क्यों चुनना ।

बीरबल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया : “मेरे प्रिय राजा, न्याय की कोई हिम्मत नहीं है क्योंकि आपके राज्य में हर जगह न्याय है । मैंने महसूस किया कि मुझे कुछ पूछने की आवश्यकता नहीं है जो मेरे पास प्रचुर मात्रा में हैं लेकिन मेरे स्वामी, निश्चित रूप से पैसे की कमी और सोने के सिक्का अच्छे होंगे ।

बीरबल की बातें सुन कर राजा अकबर को बहुत ख़ुशी हुई और उन्होंने बीरबल को १०० सोने के सिक्के भेंट के तौर पर दी गई

कहानी की नैतिक : हर किसी को समझदारी से कहना चाहिए ।


संत या बदमाश

एक रात राजा अकबर के राज्य में 

एक सिपाही: जहापनाह आपको इस वक़्त तकलीफ देने के लिए माफ़ी चाहता हु हुज़ूर ।
पर आपसे बात करनी थी ।

राजा अकबर: तोह कहो । क्या बात है ।

सिपाही: ये मेरी भतीजी के बारे में है । उसके माता पिता को एक डाकू ने कुछ महीने पहले क़त्ल कर दिया ।

राजा अकबर: (सैनिक की बातो पर सोच विचार करते हुए ) बहुत बुरा हुआ। आगे बताओ ।

सिपाही: कहती है की वो साधू एक डाकू के भेष में रह रहा है और उसी ने उसके माता पिता का क़त्ल किया है । वो सिर्फ दस साल की है, हुज़ूर । पर मुझे लगता है की वो सच कह रही है।

राजा अकबर: खैर, अभी हमारे सोने का वक़्त हो गया है लेकिन कल सुबह उसे दरबार में ले आना, हम इस पर गौर करेंगे ।

सिपाही: सुक्रिया जहापनाह, आपको तकलीफ देने के लिए फिर माफ़ी चाहता हूँ । (यह कह कर सिपाही राजा अकबर के कमरे से बहार चला जाता है । )

अगली सुबह राजा अकबर के दरबार पर राजा अकबर , सुखदेव सिंह को सारे डाकू को गिरफ्तार करने का आदेश देते है । सारे डाकू को गिरफ्त में लेने के बाद ।

राजा अकबर: बीरबल , सुखदेव सिंह जी कल रात हमारे एक भरोसेमंद सिपाही ने हमें अपनी एक समस्या बताई ।

बीरबल: हुज़ूर आप बताइये हम आपकी कैसे मदत कर सकते है , और समस्या क्या है, हुज़ूर ।

अकबर सुखदेव सिंह से: सुखदेव सिंह जी ,हमने आपको अपने राज्य और चारो आस पास के सारे डाकू को गिरफ्तार करने का काम सौपा था। उस सिपाही ने बताया की उस डाकू ने उसके भाई को कुछ महीनो पहले मार डाला था । बताइये क्या आपने सारे डाकुओ को गिरफ्तार कर लिया ?

सुखदेव सिंह: ( हिचकिचाते हुए ) हुज़ूर, हमने तक़रीबन सभी डाकुओ को पकड़ने में कामयाब हो गए थे, सिवाय एक डाकू को हम नहीं पकड़ पाए , उसकी तालाश अब तक जारी है और शायद वो छुपा बैठा है । मुझे यकीं है के हम उसे जल्द हे उसे भी गिरफ्तार कर लेंगे । वैसे भी पिछले तीन महीने में ऐसी कोई वारदात नहीं हुई है ।

राजा अकबर: आपका मतलब है एक डाकू अब भी आज़ाद है ?

बीरबल: हुज़ूर, आप समस्या बताइये शायद हम मदत कर सके ।

राजा अकबर: उस सिपाही ने हमे बताया की उसकी भतीजी ने उस डाकू को पहचान लिया है और वो एक अंधे साधु की भेष में छुपा बैठा है । हम एक छोटी सी बच्ची का यकीन भला कैसे कर ले और काफी लोग उस साधू की शक्ति का विश्वाश करते है ।

बीरबल: हुज़ूर कोई भी जादूगर अपने माया जाल से गरीब भोले भले लोग को अपने चमत्कारों से लुभाता है । थोड़ी सी जानकारी मिलने पर हम पता लगा सकते है । क्यू न हम उस सिपाही और उसकी भतीजी से मिल कर उनकी कहानी सुने ।

राजा अकबर: हां , हम भी यही सोच रहे थे । सिपाही, दिलावर सिंह और उसकी भतीजी को दरबार में पेश किया जाये ।

दिलावर सिंह और उसकी भतीजी दरबार की तरफ बढ़ते हुए

दिलावर सिंह और उसकी भतीजी राजा अकबर से: आदाब जहापनाह आदाब …

राजा अकबर: अब हमे पूरी कहानी बताओ ।

दिलावर सिंह: जहापनाह, करीब तीन महीने पहले एक डाकू मेरे भाई के घर में घुस आया मेरे भाई और उसकी पत्नी को उसने मार दिया ये छोटी बच्ची उनकी बेटी है और उस हादसे की गवाह भी उस हादसे के बाद से भारी सदमा लगने के कारण इसने बोलने की शक्ति खो दी थी ।

राजा अकबर: फिर क्या हुआ ।

दिलावर सिंह: कुछ हफ्ते पहले , मैंने एक अंधे साधु के बारे में सुना जो जंगल में रहते है । जो लोगो को ठीक करने की शक्ति रखते है ,काफी रोगी उनसे मिलने के बाद ठीक हो जाते और सुकून पाते मैंने सोचा अगर वो सुच में अंतर् यामी है तो शायद वो मेरी भतीजी को भी ठीक कर दे । इसलिए मैं उनके पास अपनी भतीजी को लेकर उन अंधे साधू से मिलने गया । जैसे ही हम उनके पास पहुंचे मेरी भतीजी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी “खुनी, कातिल , इसी ने मेरे माता पिता को मारा है । यही है खुनी कातिल ।”

अंधे साधु के भक्त: (हैरान हो कर ) ये लड़की क्या बोल रही है । इसे चुप कराओ ।

दिलावर सिंह: ये तोह चमत्कार हो गया, अपने माँ बाप के मरने के बाद इसने तोह महीनो तक एक शब्द भी नहीं कहा। साधु महाराज की शक्ति से ये दुबारा बोलने लगी ।

दिलावर की भतीजी: नहीं.. नहीं…, ये एक कातिल है , मैं ये चेहरा कभी नहीं भूल सकती ये कोई साधु नहीं है । ये खुनी है ।

भक्त: तुम इसका मुँह बंद करवाओ, ये हमारे साधु महाराज की बेज़्ज़ती कर रही है जिसने इसकी आवाज उसे लौटे है ।

अँधा साधु: नहीं… नहीं…, रहने दीजिये ये छोटी बच्ची है काफी सदमे में है ।

दिलावर सिंह: तुम्हे साधु महाराज के बारे में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए, उन्होंने तुम्हारी आवाज़ वापिस लौटाई है ।

दिलावर की भतीजी: ये साधू नहीं खुनी है ।

अँधा साधु: तुम इसे यहां से ले जाओ वार्ना मैं इसकी आवाज़ इससे वापिस ले लूंगा ।

दिलावर: इसे माफ़ कर दीजिये साधु महाराज ये नहीं जानती ये क्या बोल रहे है । चलो यह से वर्ना तुम अपनी आवाज़ फिर से खो दोगी। (यह कह कर दिलावर अपनी भतीजी का मुँह बंद कर उसे अपने साथ ले गया )

दिलावर: जहापनाह , मैं इसे घर ले गया । पर अब ये ज़िद कर रही है की वह वही चेहरा था और ये सच बोल रही है । मुझे भी यकीन हो गया है हुज़ूर पर हमारे पास कोई साबुत नहीं ।

राजा अकबर: ( गहरायी से सोचते हुए ये कहते है ) लेकिन ये कैसे साबित होगा की ये बच्ची सच कह रही है ।

बीरबल: हुज़ूर, हम ये पता लगा सकते है की ये आदमी सच्ची में अँधा साधु है या फिर एक ढोंगी । क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ ।

बीरबल अपनी योजना राजा अकबर को बताता है ।

राजा अकबर: हम्म.., ठीक है । हम कल खुद जा कर उस साधु से मिलेंगे ।

राजा अकबर दरबार से बहार जाते है ।

अगले दिन राजा अकबर अपने कुछ सिपाहियों के साथ अंधे साधु से मिलने जाते है ।

भक्त: बादशाह अकबर ज़िंदा बाद बादशाह अकबर ज़िंदा बाद ।

राजा अकबर: प्रणाम साधु महाराज

अँधा साधु: आओ बीटा ।

राजा अकबर: हमने आपकी शक्ति और चमत्कारों के बारे में इतना कुछ सुना है की हमें आना पड़ा ।

अँधा साधु: यह तोह विश्वाश ही नहीं होता, ये तोह विश्वाश की बात है ऊपर वाले की शक्ति में विश्वाश रखो और कुछ भी हो सकता है ।

राजा अकबर: ये आपका बड़प्पन है साधु महाराज हम कुछ प्रसाद चढाने आये है और आपका आशीर्वाद चाहते है ।

अँधा साधु: हमारा आशीर्वाद तो तुम्हारे साथ है ।

तभी बीरबल तलवार ले कर , दिलावर और उसकी भतीजी के साथ जा पहुँचता है ।

बीरबल: यही है वो बेईमान ,खूनी मैं अभी इसका सर काट दूंगा कातिल दरिंदा ।(कहते हुए तलवार अंधे साधु पर वार करता है )

तभी अँधा साधु भी चौक कर अपने बचाव करने के लिए बीरबल का हाथ पकड़ लेता है ।

वह पर मौजूद सभी लोग साधु को देख कर चौक जाते है ।

राजा अकबर: तो तुम अंधे हो हां । सिपाहियों इस नकली साधु को गिरफ्तार कर लो ।
तुमने इस मासूम बच्ची को अनाथ कर दिया और लोगो के विश्वाश और भावनाओ के साथ खिलवाड़ किया है । इसके लिए हम तुम्हे मौत की सजा सुनते है । ले जाओ इस आदमी को।

राजा अकबर: तुमने निडर हो कर बहादुरी से सच्चाई का साथ दिया है मेरी बच्ची इसके लिए तुम्हे इनाम दिया जायेगा ।

दिलावर और दिलावर की भतीजी: शुक्रिया जहापनाह ।

राजा अकबर: शुक्रियादा करो बीरबल का जिसने ढोंगी साधु को पकड़वाने में साथ दिया ।

बीरबल: नहीं हुज़ूर , कोई भी स्वाभाविक रूप से खतरे में अपनी सुरक्षा अवश्य करेगा अगर वो सच में अँधा नहीं हो तोह इसलिए पकड़ा गया ।


FAQ’s

Q : बीरबल का जन्म कब हुआ था ?

Ans : 1528, सीधी में

Q : बीरबल की मृत्यु कब हुई थी ?

Ans : 16 फरवरी 1586

Q : बीरबल की मौत कैसे हुई ?

Ans : माना जाता है कि 16 फरवरी 1586 को अफगानिस्तान के युद्ध में एक बड़ी सैन्य मंडली के नेतृत्व के दौरान बीरबल की मृत्यु हो गयी।


निष्कर्ष

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