कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा – Computer basic knowledge in hindi

कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा एवं प्रकार

कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा – दोस्तों ! आप सभी का मेरे ब्लॉग Shindigpeople पर स्वागत है। जैसा की आपको हमारे ब्लॉग के नाम से ही पता चल गया होगा कि इस ब्लॉग में आपको कम्प्यूटर, मोबाइल ( Mobile ), इन्टरनेट से सम्बंधित नई – नई जानकारिया मिलेगी वो भी हिन्दी में, जो आपके बहुत काम आएगी। मैं यहाँ शुरुआत बेसिक ( Basic – आधारभूत ) जानकारी से करूँगा, ताकि आपको कंप्यूटर, मोबाइल, इन्टरनेट ( Internet ) आदि के बारे में बेसिक ज्ञान हो।

तो इसी बात को ध्यान में रखकर मैं आपको इस पोस्ट में बताऊंगा की आखिर कम्प्यूटर होता क्या है ? जब हम कम्प्यूटर के बारे में सीखना चाहते है तो हमें सबसे पहले कम्प्यूटर के बारे में बेसिक जानकारी होनी चाहिए। हो सकता कि आपको कम्प्यूटर चलाना आता हो लेकिन मान लो कल को आपसे किसी ने कम्प्यूटर के बारे में सामान्यः सी बात पूछ ली और आप उसका उत्तर नहीं दे पाए, तो ऐसे में आपको कितना बुरा लगेगा। इसलिए आपको कम्प्यूटर के बारे में सामान्यः सी बाते पता होना चाहिए।

आपने ऐसे प्रशन खूब सुने होंगे कि क्या आपको कम्प्यूटर ( Computer ) चलाना आता है ? क्या आपने कम्प्यूटर में डेटा ( Data – तथ्य ) सेव ( Save – सुरक्षित करना ) कर लिया है ? ऐसे प्रश्न इसलिए क्योकि आजकल कम्प्यूटर चलाना सामान्यः सी बात हो गई है। आखिर यह कम्प्यूटर है क्या ? जो लोग कंप्यूटर के बारे में जानते है उनको मेरा यह सवाल थोड़ा अटपटा सा लगेगा क्योकि आज का युग ही कम्प्यूटर का युग है।

आज लगभग सभी को पता है कि कम्प्यूटर क्या है ? लेकिन बहुत से लोग कम्प्यूटर का मतलब सिर्फ इन्टरनेट से ही लगाते है कि अगर कम्प्यूटर है तो उसमे सिर्फ इन्टरनेट ही इस्तेमाल कर सकते है वर्ना वो किसी काम का नहीं। हाँ यह बात जरूर है कि आजकल कम्प्यूटर पर ज्यादातर काम इन्टरनेट से ही पुरे होते है।

लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है कि इन्टरनेट के बिना कम्प्यूटर किसी काम का नहीं है क्योकि कम्प्यूटर पर हम दो तरह से काम कर सकते है एक ऑनलाइन ( Online ) और दूसरा ऑफलाइन ( Offline )। आप इसे सरल भाषा में ऐसे समझ सकते हो कि ऑनलाइन काम इन्टरनेट के द्वारा पूरा होता है और ऑफलाइन काम बिना इन्टरनेट के।

ऑनलाइन काम जैसे – किसी भी वेबसाइट ( Website ) को खोलना, किसी को ईमेल ( Email ) करना, किसी से भी ऑनलाइन चैटिंग ( Chatting – बात करना ) करना, बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट ( Result – परिणाम ) देखना, आदि। ऑफलाइन काम जैसे – कम्प्यूटर में गाने सुनना, गेम खेलना, वीडियो देखना, डेटा स्टोर ( Store – संग्रह करना ) करना, टाइपिंग ( Typing ) करना, आदि। कम्प्यूटर के बारे में बहुत सी ऐसी बाते है जिनके बारे में आप नहीं जानते है। इसलिए आज मै आपको कम्प्यूटर के बारे में कुछ बेसिक जानकारी दूंगा।


कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा

कम्प्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रोनिक मशीन है जो हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती है और विभिन्न प्रक्रियाओ से गुजरकर हमें श्रेष्ठ परिणाम उपलब्ध कराती है। कम्प्यूटर को हिंदी में “संगणक” कहते है। कम्प्यूटर शब्द की उत्पति अंग्रेजी के “Compute” शब्द से हुई है। जिसका अर्थ है ‘गणना’ करना’। इसलिए इसे गणक या संगणक भी कहते है। कुछ लोग “COMPUTER” शब्द को परिभाषित करने की कोशिश करते है जैसे – ” Common Operating Machine Particularly Used in Technology Education and Research ” ।

लेकिन वास्तविकता में इसकी कोई फुल फॉर्म ( Full Form ) नहीं है। चार्ल्स बैवेज को कम्प्यूटर का पिता माना जाता है। कम्प्यूटर का आविष्कार संख्याओ की गणना करने के लिए हुआ था। लेकिन आज इसका उपयोग बहुत से कामों में किया जाने लगा है जैसे – डेटा के संग्रहण में, डॉक्यूमेंट तैयार करने में, गाने सुनने में, विडियो देखने में, गेम खेलने व बनाने में, सॉफ्टवेयर बनाने में और चलाने में, इन्टरनेट चलाने आदि कामों में लिया जाता है। आज इसका उपयोग छोटे स्तर से बड़े स्तर तक होने लग गया है।

इसके काम करने की गति बहुत ही तेज होती है। यह बड़ी से बड़ी गणना को चुटकियों में हल कर देता है। यहाँ यह प्रशन भी उठता कि जब कैलकुलेटर ( Calculator ) भी गणना कर सकता है तो फिर उसे कम्प्यूटर नाम क्यों नहीं देते।

वास्तविकता में कम्प्यूटर किसी भी उपलब्ध आकड़ों को अपने में सेव ( Save ) कर लेता है और उसको विभिन्न रूप में प्रदर्शित कर सकता है उदाहरण के लिए जब हम किसी फोटो को कम्प्यूटर पर देखते है तो उस समय कम्प्यूटर फोटो के पिक्सल ( Pixle ) की गणना कर रहा होता है और उस फोटो को स्क्रीन पर दिखाता है।

कम्प्यूटर मानव द्वारा दिए गए निर्देशो पर ही काम करता है। कम्प्यूटर के काम करने की प्रक्रिया को हम इस प्रकार समझ सकते है – “कंप्यूटर User द्वारा Input किये गए डाटा को Process करके परिणाम को Output के रूप में प्रदान करता हैं ”

computer process 2

कम्प्यूटर कई सारे कामो को एक साथ कर सकता है। कम्प्यूटर में हम अधिक मात्रा में डेटा संग्रह कर रख सकते है। कम्प्यूटर में डेटा संग्रह करने की एक निर्धारित क्षमता होती है जिसको मापने का एक मात्रक होता है जिसे हम Byte ( बाइट ), KB ( Kilo Byte – किलो बाइट ), MB ( Mega Byte – मेगा बाइट ), GB ( Giga Byte – गीगा बाइट ), TB ( Tera Byte – तेरा बाइट ), आदि के रूप में मापते है। कम्प्यूटर में किसी भी फाइल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम ( Operating System ( OS ) ) पर काम करता है क्योकि OS के बिना कम्प्यूटर खाली डिब्बा है। कम्प्यूटर दो चीजों से मिलकर बनता है 1. हार्डवेयर ( Hardware ) और 2. सॉफ्टवेयर ( Software )। हार्डवेयर कम्प्यूटर का शरीर होता है और सॉफ्टवेयर उसकी आत्मा। ये दोनों एक दूसरे के पूरक है यानि एक के बिना दूसरा किसी काम का नहीं है। सामान्य तौर पर हम कम्प्यूटर के दो ही प्रकार जानते है पहला डेस्कटॉप कम्प्यूटर दूसरा लैपटॉप कम्प्यूटर। लेकिन कम्प्यूटर के सिर्फ दो ही प्रकार नहीं है।


कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर के प्रकारों को हम निम्नलिखित दो आधारों पर बाँट सकते है।

1.आकार ( Size ), गति ( Speed ), कीमत ( Cost ), क्षमता ( Capacity ) के आधार पर।
2.एप्लीकेशन ( Application ) के आधार पर।

1.आकार ( Size ), गति ( Speed ), कीमत ( Cost ), क्षमता ( Capacity ) के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार –

  1. माइक्रो कम्प्यूटर ( Micro Computer )
  2. मिनी कम्प्यूटर ( Mini Computer )
  3. मेनफ़्रेम कम्प्यूटर ( Mainframe Computer )
  4. सुपर कम्प्यूटर ( Super Computer )

1.माइक्रो कम्प्यूटर के प्रकार – माइक्रो कम्प्यूटर के भी कई प्रकार होते है।

  • डेस्कटॉप कम्प्यूटर ( Desktop Computer )
  • लैपटॉप या नोटपैड कम्प्यूटर ( Laptop or Notepad Computer )
  • टैबलैट ( Tablet )
  • स्मार्टफोन ( Smartphone )
  • पी.डी.ए. ( PDA – Personal Digital Assistant )

2.एप्लीकेशन के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार –

  • एनालॉग कम्प्यूटर ( Analog Computer )
  • डिजिटल कम्प्यूटर ( Digital Computer )
  • हाइब्रिड कम्प्यूटर ( Hybrid Computer )

कम्प्यूटर की पीढ़िया – कम्प्यूटर का विकास पांच पीढ़ियों में हुआ है।

पीढ़ीसमयखासियत
प्रथम पीढ़ी1940 से 1955वैक्युम ट्यूब ( Vacuum Tube )
द्वितीय पीढ़ी1956 से 1963ट्रांज़िस्टर ( Transister )
तृतीय पीढ़ी1964 से 1971इंटीग्रेटेड सर्किट ( Integrated Circuit )
चतुर्थ पीढ़ी1971 से वर्तमान तकमाइक्रो प्रोसेसर ( Micro Processor )

कम्प्यूटर के अंग

कम्प्यूटर के कई अंग होते है जिनके मिलने से कम्प्यूटर बनता है जो हार्डवेयर कहलाते है। मैं यहाँ आपको कम्प्यूटर के महत्वपूर्ण हार्डवेयर के बारे में बताऊंगा।

  1. मॉनिटर ( Moniter )
  2. की बोर्ड ( Key Board )
  3. माउस ( Mouse )
  4. सी.पी.यू. ( CPU – Central Processing Unit , Processor )
  5. रैम ( RAM – Random Access Memory )
  6. हार्ड डिस्क ( Hard Disk )
  7. मदर बोर्ड ( Mother Board ) आदि।

कम्प्यूटर की विशेषता 

  1. कम्प्यूटर तेज गति से कई सारी व बड़ी गणना को हल कर देता है। और कोई गलती भी नहीं करता। 
  2. कम्प्यूटर पर आप एक समय में कई सारे काम कर सकते है।
  3. कम्प्यूटर पर आप इन्टरनेट चला सकते है। 
  4. कम्प्यूटर में आप गाने सुन सकते है, विडियो देख सकते है, गेम खेल सकते है और भी बहुत कुछ कर सकते है।
  5. आप ऑनलाइन खरीददारी कर सकते है।
  6. आप ऑनलाइन पैसे भी काम सकते है।
  7. आप किसी से भी चैट कर सकते हो, या ईमेल भेज सकते हो आदि बहुत सारे काम कर सकते है।

कम्प्यूटर का महत्त्व – जैसा की हमने ऊपर बताया है कि आज का युग ही कम्प्यूटर का युग है। इस बात से आप समझ सकते हो कि कम्प्यूटर का क्या महत्त्व है। इसका उपयोग हर क्षेत्र में होने लग गया है जैसे – बैंक में, शिक्षा के क्षेत्र में, हॉस्पिटल में, रेलवे में, आदि।


FAQ’s

Q : कम्प्यूटर क्या होता है?

Ans : कम्प्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रोनिक मशीन है जो हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती है और विभिन्न प्रक्रियाओ से गुजरकर हमें श्रेष्ठ परिणाम उपलब्ध कराती है। कम्प्यूटर को हिंदी में “संगणक” कहते है। कम्प्यूटर शब्द की उत्पति अंग्रेजी के “Compute” शब्द से हुई है। जिसका अर्थ है ‘गणना’ करना’। इसलिए इसे गणक या संगणक भी कहते है।

Q : आकार के आधार पर कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं नाम लिखिए?

Ans : माइक्रो कम्प्यूटर, मिनी कम्प्यूटर , मेनफ़्रेम कम्प्यूटर, सुपर कम्प्यूटर

Q : कंप्यूटर का जनक कौन है?

Ans : चार्ल्स बैबेज


निष्कर्ष

मैं आशा करता हूँ कि आपको यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप हमें फेसबुक पर फॉलो भी कर सकते हो। यहाँ साइड में आपको फेसबुक पेज दिखाई देगा उसके Like बटन पर क्लिक करे और हमारी नई – नई पोस्टो को फेसबुक पर पाए। हो सके तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगो के साथ शेयर करे। क्योकि ज्ञान बाँटने से बढ़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *