Essay on newspaper in Hindi | समाचार पत्र पर निबंध

Essay on newspaper in Hindi | समाचार पत्र पर निबंधसमाचार – पत्र विज्ञान को उन्नति होने के साथ – साथ संसार का विस्तार मानो कम होता जा रहा है। सारे संसार की खबरों को जानना अब सभी लोगों के लिए अधिका धिक आवश्यक होता जा रहा है। इसलिए समाचार – पत्र आज के जीवन का अनिवार्य अंग बन गए हैं।

कितने ही ऐसे शिक्षित व्यक्ति हैं,जिन्हें यदि सवेरे समाचार – पत्र पड़ने को न मिले तो उन्हें ऐसा लगता रहता है कि जैसे नित्य के कार्यक्रम में कोई बड़ी कमी रह गई है ।

Essay on newspaper in Hindi | समाचार पत्र पर निबंध

Essay on newspaper in Hindi | समाचार पत्र पर निबंध

समाचार – पत्र कई प्रकार के होते हैं। कुछ समाचार – पत्र प्रतिदिन छपते हैं,कुछ सप्ताह में दो बार और कुछ सप्ताह में केवल एक बार। कुछ पत्र प्रातःकाल प्रकाशित होते हैं और कुछ सायंकाल। किन्तु इन सबका उद्देश्य जनता को विभिन्न प्रकार के समाचार पहुंचाना ही होता है। समाचार – पत्रों में अनेक प्रकार की खबरें होती हैं।

आजकल सबसे अधिक प्रमुखता राजनीतिक समाचारों को दी जाती है। कहां,किस देश में,क्या राज नीतिक उथल – पुथल हो रही है,इसमें प्रायः सभी लोगों की रुचि होती है। इसके बाद बड़े – बड़े नेताओं के वक्तव्य,तथा डाके,कत्ल और चोरी इत्यादि की सनसनी खेज घटनाएं होती हैं। इस प्रकार की घटनाओं को भी लोग बड़े चाव से पढ़ते हैं।

इसके अतिरिक्त व्यापार के समाचार भी होते हैं। खेलों के समाचार के लिए प्रायः एक अलग ही पृष्ठ होता है। बहुत – से लोग सिनेमा के पृष्ठ को भी बड़े चाव से पढ़ते हैं। इस सबके अतिरिक्त समाचार पत्रों में विभिन्न प्रकार से विशा पन प्रकाशित होते हैं,जिनमें बहुत से लोगों की चि होती है। समाचार – पत्रों से अनेक लाभ हैं। इस नये पैसे का समाचार – पत्र खरीदकर हम सारे संसार के समाचार जान सकते हैं।

यदि कोई घटना हमारे अनुकूल या प्रतिकूल हो,तो हम पहले से ही सावधान होकर उससे लाभ उठा सकते हैं या उससे होने वाली हानि से अपना बचाव कर सकते हैं। व्यापारी लोग अख बारों में विज्ञापन देकर अपने सामान की बिजी बढ़ाते हैं। बेकार लोग रिक्त स्थानों के विज्ञापन पढ़कर अपने लिए नौकरियां खूबते हैं और प्राजकल तो बहुत से विवाह भी समाचार – पत्रों के विज्ञापन द्वारा ही होते हैं।

समाचार – पत्रों में केवल समाचार ही नहीं होते . अपितु उनमें दो अन्य प्रमुख स्तम्भ भी होते हैं। एक स्तम्भ तो वह होता है जिसमें सम्पादक का अग्रलेख होता है। इस अमलेन में किसी भी महत्त्वपूर्ण विषय को लेकर उसके बारे में सम्पादक अपनी सम्मति प्रकट करता है। साधारणतया सम्पादक की जानकारी साधारण पाठक की अपेक्षा अधिक होती है,इसलिए वह हरएक प्रश्न पर अपनी कुछ सुलझी हुई सम्मति पाठक के सम्मुखे रख पाता है।

इस अग्रलेख को पड़कर पाठक भी अपने विचार बना सकता है। इस प्रकार समाचार – पत्र लिसी भी विषय में जनता की सम्मति को किसी खास दिशा में मोड़ने में सहायक होते हैं। सम्पादकीय स्तम्भ के अतिरिक्त एक पाठकों का स्तम्भ होता है,जिसमें पाठकों के विचार प्रकट किए जाते हैं। इस प्रकार पाठक लोग भी समाचार – पत्रों के माध्यम से अपने विचार दूसरे पाठकों तक पहुंचा पाते हैं। समाचार – पत्रों का विकास उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ।

उसके पहले न तो समाचार – पत्र छाप पाने की सुविधाएं ही थीं,और न समाचारों में जनता की उतनी रुचि ही थी,जितनी कि आजकल है। समाचार – पत्रों का विकास शिक्षा प्रसार के साथ ही साथ बढ़ता है। जिन देशों में जनता अधिक शिक्षित है,वहां समाचार – पत्र बहुत बड़ी संख्या में छपते हैं। इंग्लैंड,अमेरिका और रूस में ऐसे अनेक पत्र हैं,जिनकी प्रतिदिन लाखों प्रतियां छपती हैं। इस दृष्टि से अभी भारत बहुत पिछड़ा हुआ है।

यहां एक लाख छपने वाले पत्रों की संख्या भी शायद दो या तीन से अधिक नहीं होगी। आजकल प्रजातन्त्र का युग है और प्रजातन्त्र में समाचार – पत्रों का महत्त्व बहुत अधिक समझा जाता है। इसे चौथी ‘ आस्ति ‘ ( जायदाद ) कहा जाता है। इसका कारण यह है कि समाचार – पत्र जनमत को बना या बिगाड़ सकते हैं और इसीलिए चुनाव के अवसर पर किसी एक पक्ष को जिताने या हराने में उनका बड़ा हाथ रहता है।

इसीलिए प्रजातन्त्रीय देशों में सभी बड़े – बड़े राजनीतिक दल अपने – अपने समाचार – पत्र प्रकाशित करते हैं ; और जिस दल के समाचार – पत्र अधिक प्रभावशाली होते हैं,प्रजातन्त्र में प्रायः उसीके हाथ में शासनसत्ता रहती समाचार – पत्र सरकार और जनता के बीच में एक माध्यम के रूप में भी कार्य करते हैं। सरकार जो कुछ निश्चय करती है,जिस प्रकार की नीति चलाना चाहती है,उसे वह समाचार – पत्रों द्वारा जनता तक पहुंचा देती है।

इसी प्रकार जब किसी विवाद को लेकर जनता में असन्तोष उठ खड़ा होता है,तब समाचार पत्र जनता की आवाज को सरकार तक भी पहुंचाते हैं। यदि सरकार जनता की इच्छाओं की अवहेलना करे,तो पागामी चुनावों में जनता सरकार को बदल सकती है। समाचार – पत्रों के हाथों में बहुत बड़ी शक्ति है। बड़े – बड़े प्रभावशाली पत्र किसी भी प्रश्न के पक्ष या विपक्ष में आंदोलन खड़ा कर सकते हैं और जनमत को जागरित करके सरकार को अपनी बात मनवाने के लिए विवश कर सकते हैं।

भारत के स्वाधीनता – संग्राम में देश के समाचार – पत्रों ने बहुत महत्त्वपूर्ण भाग लिया था। इसी प्रकार अनेक सामाजिक कुरीतियों को हटाने का श्रेय भी बहुत कुछ समाचार – पत्रों को ही है। जहां समाचार – पत्रों में इतनी अधिक शक्ति है,वहां उनपर बहुत बड़ी जिम्मे दारी भी आ पड़ती है। क्योंकि यदि शक्ति हो और उसके साथ विवेक न हो,तो वह शक्ति लाभकारी न होकर हानिकारक भी हो सकती है।

जहां समाचार – पत्र जनमत को बदल सकते हैं,वहां उनका यह कर्तव्य हो जाता है कि वे उसको ठीक रास्ते पर ही ले चलें,गलत पर नहीं। प्रायः यह देखा जाता है कि बहुत – से घटिया दर्जे के समाचार – पत्र बहुत बार केवल लोगों में सनसनी पैदा करने के लिए झूठे समाचार भी प्रकाशित कर देते हैं। बहुत – से पत्र हत्या,व्यभिचार,अपहरण आदि के समाचारों को बहुत महत्त्व देकर बड़े – बड़े शीर्षकों में छापते हैं और पाठकों की कुत्सित मनो वृत्तियों को तृत्त करके अपना प्रचार बढ़ाते हैं।

बहुत – से समाचार – पत्रों में झूठे विज्ञापन छपते हैं,जिनसे नासमझ लोग ठगे जाते हैं और नुकसान उठाते हैं। बहुत बार समाचार – पत्र मामूली छोटी – छोटी घटनाओं को व्यर्थ ही बहुत बढ़ा – चढ़ाकर इसप्रकार जनता के सामने प्रस्तुत करते हैं,जिससे लोगों में उत्तेजना फैल जाती है और बहुत बार तो भयानक उपद्रव हो जाते हैं। यदि समाचार – पत्र संयम और विवेक से काम लें,तो देश में होने वाली अनेक अप्रिय घटनाओं को रोका जा सकता है।

जहां तक विशुद्ध पत्रकारिता का प्रश्न है,पत्र – सम्पादकों को निष्पक्ष और तटस्थ होना चाहिए। समाचार बाहे अपने मन के अनुकूल हो या प्रतिकूल,किन्तु किसी भी दशा में उसको घटाया या बढ़ाया नहीं जाना चाहिए। सम्पादकीय अग्रलेख में समाचारों के बारे में सम्पादक अपनी सम्मति प्रकट करे,इसमें कोई दोष नहीं है। किन्तु समाचार को ही अपने मन के अनुसार रंग डासना अनुचित है।

समाचार – पत्रों ने लम्बे संघर्ष के पश्चात् यह अधिकार प्राप्त किया है कि ये समाचारों को स्वतंत्रतापूर्वक छाप सकें और उनके सम्बन्ध में अपना मतामत निर्भी कतापूर्वक प्रकट कर सकें। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रजातंत्र में मनुष्य का महत्त्व पूर्ण अधिकार मानी जाती है। किन्तु वह अधिकार तभी बना रह सकता है,जब कि पत्र – सम्पादक विवेक से काम लें।

यदि स्वाधीनता का दुरुपयोग किया जाने लगे और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का उपयोग देवा – विरोधी कार्यों और जनता के विभिन्न वर्गों में परस्पर द्वेष फैलाने के लिए किया जाए,तो ऐसी स्वतन्त्रता देर तक बनी नहीं रह सकती। इसलिए समाचार – पत्रों को स्वयं इस दिशा में सतर्क रहना होगा कि वे स्वयं अपनी स्वाधीनता के मूल पर कुठाराघात न करें।

प्रातःकाल उठते ही हम लोग समाचार – पत्र में जो खबरें पा लेते हैं,उनके पीछे सैकड़ों व्यक्तियों का परिश्रम छिपा रहता है। पत्रों के सम्वाददाता सारी दुनिया में फैले रहते हैं। वहां से वे तार या पत्र द्वारा सम्वाद भेजते हैं। समाचार – पत्रों के कार्यालयों में चौबीसों घंटे काम होता है। समाचारों का यथोचित सम्पादन करने के बाद उन्हें प्रेस में भेजा जाता है।

रात – रात – भर जागकर लोग अखबार तैयार करते हैं और तब कहीं सवेरे वह पाठकों के हाथ तक पहुंच पाता है। समाचारों की दृष्टि से समाचार – पत्रों का एक और प्रतिद्वंद्वी उठ खड़ा हुआ है और वह है – रेडियो। जो समाचार अगले दिन सवेरे अखवार से मिलते हैं . प्रायः वे सब के सब उससे पहले दिन रात को ही रेडियो पर सुनाई पड़ जाते हैं।

परन्तु रेडियो पर समाचार अपेक्षाकृत बहुत संक्षिप्त होते हैं,इसलिए रेडियो सुनने वाले लोग भी प्रायः समाचार – पत्र खरीदते ही हैं। जब तक भारत में विदेशी सरकार थी,तब तक उसने शिक्षा – प्रसार की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया। इसी कारण देश में शिक्षित लोगों की संख्या बहुत कम रही और समाचार – पत्रों का प्रचार भी बहुत नहीं हो पाया।

किन्तु अब स्वतन्त्र देश की सरकार शिक्षा की ओर बहुत ध्यान दे रही है और जनता की रुचि भी राजनीतिक मामलों में बहुत बढ़ती जा रही है। इसलिए भविष्य में समाचार – पत्रों की स्थिति अब की अपेक्षा कहीं अधिक अच्छी होने की पूरी संभावना है।

जब इंग्लैंड जैसे पांच करोड़ की आबादी के देश में प्रतिदिन दस – दस और बीस – बीस लाख छपने वाले पत्र विद्यमान हैं,तो कोई कारण नहीं कि भारत जैसे विशाल देश में शिक्षा का यथेष्ट प्रचार हो जाने के बाद ऐसे समाचार – पत्र क्यों न हो जाएं,जिनकी प्रतिदिन एक करोड़ प्रतियां छपती हों। यह समय चाहे कितनी ही दूर क्यों न हो,किन्तु यह निश्चित है कि हमारे देश में समाचार – पत्रों का भविष्य अत्यन्त उज्ज्वल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *