khargosh aur kachhua ki kahani in hindi – खरगोश और कछुआ

दोस्तों हम लोगों ने बचपन से khargosh ki aur kachhua ki kahani कहानी सुनते और पढ़ते आये, लेकिन इस कहानी में हम पढ़ेंगे की के एक कछुआ नदी पर करके खरगोश का घमंड तोड़ता है तो चलिए शुरू करते है।

khargosh aur kachhua ki kahani in hindi - खरगोश और कछुआ

खरगोश और कछुए की कहानी

खरगोश और बंदर बहुत अच्छे दोस्त थे वे हर रोज खुद खेलते और कभी-कभी दौड़ भी लगाते थे। उन्हें देख कछुआ को भी दौड़ लगाने का बहुत मन करता।

कोई भी कछुए के साथ खेलना पसंद नहीं करता था क्योंकि वह बहुत धीरे धीरे चलता था।

एक दिन खरगोश और बंदर दौड़ लगा रहे थे तभी कछुए को उन्हें देख दौड़ लगाने का मन हुआ।

कछुए नहीं कहां ” तुम लोग मेरे साथ क्यों नहीं खेलते मुझे भी तुम्हारे साथ खेलना है मुझे भी अपने साथ खिला लो “

खरगोश और बंदर कछुए की बात सुनकर जोर जोर से हंसने लगे। खरगोश नहीं कहा ” तुम तो इतने धीरे धीरे चलते हो कैसे दौड़ लगाओगे, बताओ “

कछुआ अब भी उन दोनों के साथ दौड़ लगाना चाहता था तो उसने कहा ” इसका यह मतलब हुआ कि मैं हार जाऊंगा और तुम जीत जाओगे तो तुम डर क्यों रहे हो मुझसे “

कछुए की बात सुनकर खरगोश जोश में आ जाता है और कहता है ” अच्छा यह बात है ठीक है आओ मैं तुम्हारे साथ दौड़ लगाऊंगा, और बंदर तुम बताना कि कौन जीता। “

बंदर ने कहा ” ठीक है दिन ढलने से पहले जो नदी का चक्कर लगाकर वापस आएगा वह जीत जाएगा लेकिन सबसे पहले चक्कर लगा कर आएगा वही जीतेगा। “

दौड़ शुरू हो गई कछुआ धीरे-धीरे नदी की तरफ बढ़ने लगा और दूसरी तरफ खरगोश कुछ ही देर में नदी का आधा चक्कर लगा चुका था।

कछुए ने सोचा ” मुझसे जीतना तो नामुमकिन है वह बेचारा कछुआ तो बहुत पीछे होगा चलो थोड़ी देर आराम कर लेता हूं। “

खरगोश पेड़ के नीचे सो गए पर कछुआ बेचारा चलता रहा पूरी नदी का चक्कर लगा लिया और जीत गया।

कछुए को नदी का चक्कर लगाकर पहले वापस आता देख बंदर हैरान रह गया।

खरगोश अपने घमंड के कारण हार चुका था और कछुआ आत्मविश्वास से जीत गया।

सीख:- हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए।

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