5 बेहतरीन पंचतंत्र की कहानियां बच्चों के लिए

Panchatantra Ki kahaniyan bacchon ke liye – हेलो दोस्तों मैं पंचतंत्र की कहानियां बच्चों के लिए लेके आया हु। जिसमे 5 बेहतरीन पंचतंत्र की कहानियां शामिल है जो की काफी मजेदार है और साथ नैतिकता से सम्बंधित है, तो चलिए शुरू करते है।

5 बेहतरीन पंचतंत्र की कहानियां बच्चों के लिए - panchtantra ki kahaniyan bacchon ke liye

राजा और मूर्ख बंदर

एक बार एक राजा था वह शिकार के लिए गया, उसे एक बंदर मिला जो पेड़ पर बैठा था और पेड़ से फल तोड़कर राजा को दे रहा था।

राजा को उसकी यह बात पसंद आई और वह उस बंदर को महल लेकर गया।

अब राजा जहां भी जाता तो वह बंदर राजा के साथ ही जाता, वह उसका सबसे अच्छा मित्र बन गया।

राजा का मित्र बनने पर भी वह बंदर बहुत ही मूर्ख था। राजा का प्रिय होने के कारण उसे महल में हर जगह जाने की अनुमति थी बिना कोई रोक-टोक के।

उसे शाही महल में इज्जत दी जाती थी। यहां तक कि वो राजा के कमरे में आराम से आ जा सकता था, जहां राजा के सेवकों को भी आना-जाना मना था।

एक दिन राजा अपने कमरे में आराम से सो रहे थे और बंदर राजा की बिस्तर के पास उसकी रखवाली कर रहा था।

उसी समय बंदर ने देखा कि एक मक्खी आकर राजा की नाक पर बैठ गई।

बंदर ने उसे एक बार भगा दिया, थोड़ी देर बाद वह मक्खी दुबारा राजा की नाक पर आकर बैठ गई, बंदर ने दोबारा उसे अपने हाथों से भगा दिया।

थोड़ी देर के बाद बंदर ने फिर से देखा, वह मक्खी फिर से आकर राजा की नाक पर बैठ गई।

मक्खी के बार-बार आने से राजा की नींद खराब हो रही थी और इससे बंदर को गुस्सा आ रहा था।

वह गुस्से में आकर मक्खी को मारने की कोशिश करने लगा, लेकिन वह बार-बार उड़ जाती थी।

बंदर के पास राजा की तलवार रखी हुई थी। बंदर ने उस तलवार को उठाया और मक्खी को मारने के लिए मौका देखने लगा।

कुछ देर बाद वह मक्खी दोबारा आई और इस बार फिर से राजा की नाक पर आकर बैठ गई।

बंदर तो पहले से ही तैयार था उसने आव देखा ना ताव और तलवार से मक्खी पर हमला कर दिया।

मक्खी नहीं मारी पर राजा की नाक कट गई और वह बुरी तरह से घायल हो गया।

सीख:- मूर्ख दोस्तों से सावधान रहें, वह आपके दुश्मन से भी ज्यादा नुकसान कर सकते हैं।


फूटा घड़ा

एक गांव में श्याम नाम का किसान था। उसका एक छोटा सा खेत था उसके पास दो मिट्टी के घड़े थे जिसे वह रोज अपने घर के लिए पानी लेकर आता था।

लेकिन उनमें से एक घड़ा फूट चुका था। जिसके वजह से एक घड़ा भरा हुआ रहता था और दूसरा घड़ा आधा भरा हुआ होता था।

फूटा हुआ घड़ा बहुत शर्मिंदा रहता था क्योंकि वह आधा पानी ही घर पहुंचा पाता।

नया और सही घड़ा को इस बात का बहुत घमंड था वह पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाथा इसलिए वह फोटो घड़ी को कहता है ” तुम आधा पानी ला कर मरने का मेहनत बेकार कर देते हो। “

यह सुनकर फोटो घड़ी को बहुत बुरा लगता है। दोनों घरों की बातें सुनकर श्याम होते गए को कहता है ” तुम सिर्फ अपनी बुराई देख रहे हो और मैं तुम्हारी छिपी हुई अच्छाई भी देख रहा हूं इसलिए मुझे कभी तुम पर कभी दिखाई नहीं दी। “

फूटा घड़ा सोच में पड़ जाता है और हो श्याम से पूछता है ” पर वह कैसे ? “

श्याम कहता ” हर रोज हम जब नदी से वापस आते हैं तो तुम्हारा आधा पानी जमीन पर गिर जाते हैं जिससे वहां फूलों को खोजने में मदद मिलती है तो तुम कैसे कह सकते हो कि तुम किसी काम के नहीं। “

फूटा घड़ा सोच में पड़ जाता है और दोबारा श्याम से पूछता है ” इन सब में आपकी मदद कैसे हुई ? “

श्याम ने जवाब दिया ” अब मैं खेती के साथ साथ उन फूलों को भी बेचने लगा हूं जिससे मेरे पास और अधिक धन आ जाता, उस धन से में खेत के लिए ज्यादा और अच्छे बीज खरीद लेता हूं। ये सब तुम्हारी वजह से हुआ “

सीख:- हमें कभी भी किसी के हुनर का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए बल्कि उसकी अच्छाई को ढूंढ कर उसे और निखारना चाहिए।


एकता में बल

एक जंगल में बहुत ही खतरनाक शेर रहता था।

वो जंगल का राजा था और वह बहुत खतरनाक भी इसलिए उसे सब डरते थे।

वह जब चाहता है किसी भी जंगल के जानवर को खा जाता शिवाय चार दोस्त गायों को छोड़कर।

चारों बहुत ताकतवर थी क्योंकि वह हमेशा एक साथ रहती थी।

जब चारों गाय एक साथ होती तब शेर चाह कर भी किसी एक गाय को पकड़ भी नहीं पाता। चारों गए एक दूसरे का बहुत ख्याल रखती थी।

एक दिन चारों गायों का आपस में झगड़ा हो जाता है।

चारों एक दूसरे से बहुत झगड़ते हैं और वह तय करते हैं कि वह अब से कभी एक साथ नहीं घूमेंगे।

चारों गायों को झगड़ा करते हुए शेर देख लेता है और इस मौके का शेर ने पूरा फायदा उठाया।

शेर ने एक एक कर के चारों गाय को अपना भोजन बना लिया।

सिख:- एकता में बहुत शक्ति होती है


दो बगुले और कछुआ

कई साल पहले एक जंगल में एक छोटी सी झील थी।

उस झील में एक कछुआ रहा करता था। उस झील के किनारे 2 बगुले भी रहा करते थे।

बगुले और कछुआ अच्छे दोस्त बन गए थे और साथ में खेला करते थे।

कछुआ का ये मानना था कि वो बहुत चालाक है। उसने अपने चतुराई से बंसी बनाई और उस बंसी से मछलियां पकड़ कर वो बगुले को दिया करता था। कछुए के दिए हुए मछलियों को खा कर बगुले बहुत खुश होते थे।

एक बार जंगल में भयानक सूखा पड़ा। सारे पेड़ सुख गए थे। नहर में भी एक बूंद पानी नहीं बचा था।

खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा था इसलिए उन तीनों दोस्तो को भूखा रहना पड़ रहा था।

पहला बगुला:- दोस्त, सारे पेड़ सुख गए है और नहर में तो पानी ही नहीं। खाने को मछलियां भी नहीं, हमे नजदीक ही एक झील ढूंढ़ लेना चाहिए।

दूसरा बगुला:- हा ये सच कह रहे हो, बाकी सारे जानवर भी तो यहां से चले गए है। खाने के बगैर हम कैसे जाएंगे, अगर हम दूसरी जगह नहीं ढूंढेंगे तो हम भी मर जाएंगे इसलिए कल हम दोनों यहां से चले जाएंगे।

दोनो बगुले कि बातें कछुआ सुन लेता है।

कछुआ:- मेरे दोस्त हम तीनों यहां कितनी अच्छी तरह से रहते, क्या तुम मुझे यही छोड़ कर चले जाओगे ? मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।

पहला बगुला:- माफ करना मेरे दोस्त, हम भी तुम्हे साथ ले जाना चाहते है पर कैसे ले जाए। हम तुम्हे अपनी पीठ पर बिठा कर ले जाए तो हो सकता है तुम गिर जाओ।

दूसरा बगुला:- हा, और अगर हम तुम्हे पांव से पकड़ कर ले जाने की सोचे तब भी तुम्हारी शरीर इतनी बड़ी है कि हम तुम्हे पांव से नहीं पकड़ सकते। तुम ही बताओ हम क्या करे ?

कछुआ:- आप दोनो मेरे बारे में इतना सोचते है। धन्यवाद, तुम तो जानते ही हो मै कितना बुद्धिमान हूं इसलिए मैंने एक तरकीब सोची है।

बगुले:- तुम सच कहते हो, तुम हम दोनों से ज्यादा बुद्धिमान हो। क्या सोचा है बताओ ?

कछुआ:- तुम दोनों जा कर कहीं से मोटी सी, लंबी सी, तगड़ी सी, एक लकड़ी ले आओ मै उस लकड़ी को अपने दांतों से पकड़ लेता हूं, तुम दोनों उस लकड़ी को दोनो तरफ से अपने मुंह में पकड़ कर उड़ जाना इस तरह हम तीनो एक साथ जा सकेंगे।

कछुए की बातें सुन कर दोनो बगुले दंग रह गए और वो दोनो जा कर एक लम्बी सी, मोटी सी, तगड़ी सी लकड़ी ले आए।

कछुए ने उस लकड़ी को अपने जबड़ों से जोर से पकड़ लिया और फिर तीनों एक साथ उड़ के उस जंगल से बाहर निकाल गए।

इस तरह उड़ते हुए एक गांव से गुजर रहे थे तो नीचे खेल रहे बच्चे उन तीनों को देख के तालियां बजाने लगे और खुश होने लगे उनमें से एक बच्चे ने जोर से चिल्लाते हुए कहा ” देखो देखो वो बगुले कितने बुद्धिमान है, उस कछुए को कितनी आसानी से उस लकड़ी में लटका के ले जा रहे है, शायद इंसान से भी बुद्धिमान है। “

बच्चे की बातें सुन कर कछुए को गुस्सा आने लगा और बगुलों भी चुपचाप उनकी बातें सुन रहे थे ये देख कछुए का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया।

कछुए ने मुंह खोल के कहा ” ये तरकीब तो मैंने बताई है। “

बेचारा कछुआ ये कहने के लिए मुंह खोलता है और मुंह खोलते ही कछुआ ऊपर से गिर गया और गिर कर मर गया। ये देख दोनो बगुले बहुत दुखी हुए, दोनो बगुले कुछ कर भी नहीं सकते थे इसलिए वो वहा से उड़ते हुए चले गए।

शिक्षा:- ” हम कोई भी काम करे, हमे बहुत सोच समझ कर करना चाहिए, वरना हमारी हालत भी कछुए की तरह हो सकती है। “


हाथी और चींटी

एक बार की बात है जंगल में ढेर सारे जानवर रहते थे ।

वही एक शैतान हाथी भी रहता था जिसका नाम था जंबो ।

जंबो सभी जानवरो को खूब सताता था क्यू की वो बाकी जानवरो से सबसे बड़ा और विशाल जो था ।

उसी जंगल में चिटयों का एक परिवार रहता था ।

वह बहुत ही मेहनती परिवार था ।

वो दिन के समय खाना इखट्टा करते ।

एक दिन जब वो खाना जमा कर रहे थे तभी वह जंबो आ गया और उनपर पानी डालने लगा

चिटयों का झुंड लाचार महसूस करते हुए : कृपया कर के हमारे ऊपर पानी मत डालो ,हम बड़ी मुश्किल से खाना जमा कर रहे है ।

जंबो ताव से : मैं जो चहु वो कर सकता हु ।

तुम कितनी छोटी हो मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती ।

यह सुनकर चींटी को बहुत बुरा लगा और वो निराश होकर वो अपनी घर चली गयी ।

एक दिन जब जंगल में एक शिकारी आया, जंबो बड़ी बिछाई हुई जाल में फास गया ।

शिकारी ने जैसे हे जंबो पर निशाना लगाया तभी अचानक उसकी गर्दन पर दर्द हुआ और उसका निशाना चुक गया ।

जंबो ने तभी जाल हटा कर शिकारी पर छलांग लगा दी और शिकारी के पीछे भगा ।

शिकारी वहा से खली हाथ चला गया ।

जंबो ने चींटी को देखा और बोला : तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया चींटी आज तुमने मेरी जान बचा ली अब मैं कभी किसी को परेशान नहीं करूंगा । अब मैं समझ चूका हु की छोटी से छोटी चींटी भी बड़ा काम कर सकती है ।

चींटी :हाँ, कभी किसी को कमज़ोर नहीं समझना चाहिए ।

तभी से हाथी और चींटी आछे दोस्त बन गए ।

हाथी खाना जमा करने में चीटियों की मदत करने लगा और ख़ुशी-ख़ुशी जंगल में रहने लगे ।

बाकी जानवर भी अब बहुत खुश रहने लगे ।

मैं आशा करता हूँ कि आपको यह पोस्ट कहानी अच्छी लगी होगी। आपको इस पोस्ट से सम्बंधित कोई भी परेशानी हो तो हमें कमेन्ट बॉक्स ( Comment Box ) में कमेंट करे। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी कमेन्ट कर सकते हो। हमारे फेसबुक पेज को लाइक ( Like ) करना ना भूले। जिसके द्वारा आपको हमारी नई पोस्ट फेसबुक पर मिल जाये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *