यात्रा शिक्षा का एक अहम हिस्सा है निबंध

यात्रा शिक्षा का एक अहम हिस्सा है निबंध  – दोस्तों शिक्षा के महत्व अंदाजा लगा पाना बहुत मुश्किल क्युकी शिक्षा जीवन को काफी हद तक आसान बना देती है। लेकिन कई ऐसे लोग होते है जो सिर्फ किताबी कीड़े बनकर रह जाते है वे न तो बाहर घूमते और की यात्रा पे भी जाते है जिससे की उनको बहार की दुनिया का कोई ज्ञान नहीं होता है। इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माधयम से पढ़ेंगे की यात्रा शिक्षा का एक अहम हिस्सा है।

 

यात्रा शिक्षा का एक अहम हिस्सा है निबंध

शिक्षा प्राप्त करने के दो उपाय हैं। एक तो यह कि हम जिस वस्तु के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, उसे स्वयं जाकर देखें और दूसरा यह कि जिन लोगों ने उस वस्तु को देखा है, उनसे उसके विषय में सुनें, या उस विषय में लिखी हुई पुस्तकों को पढ़ें। मनुष्य का जीवन इतना अल्प है और उनके साधन इतने कम हैं कि वह संसार के सब भागों को और संसार की सब वस्तुओं को स्वयं जाकर नहीं देख सकता।

इसलिए उसे पुस्तकों की शरण लेनी पड़ती है। समय – समय पर अनेक साहसी और उत्साही लोग संसार के विभिन्न भागों का भ्रमण कर चुके हैं और उनके विषय में मनोरंजक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें लिख चुके हैं। इसलिए आज अगर हम चाहे तो घर बैठे ही उन पुस्तकों को पढ़कर संसार के सम्बन्ध में जान कारी प्राप्त कर सकते हैं।

परन्तु इस प्रकार की जानकारी से मनुष्य का ज्ञान न तो पूर्ण हो सकता है और न मनुष्य को संतोष ही हो पाता है। इसलिए यात्रा करके वस्तुओं को और प्रदेशों को अपनी आंखों से देखना भी शिक्षा का आवश्यक अंग है। पुस्तकों में हम पढ़ते हैं कि हिमालय के वन बने हैं। उनमें ऊंचे – ऊंचे पेड़ होते हैं। उनमें भयंकर जंगली पशु पाए जाते हैं ; अजगर सांप होते हैं। परन्तु जब तक हम एक बार स्वयं जाकर उन वनों को न देख आएं, तब तक हम यह नहीं समझ सकते कि हमने उनके विषय में पूरा ज्ञान प्राप्त कर लिया है, या उनके बारे में हमारे मन में स्पष्ट धारणा बन गई है।

इसी प्रकार हिमाच्छादित पर्वत – शिखरों, सुनसान तपती हुई मरुभूमियों, बर्फ से ढके ध्रुव प्रदेशों के सम्बन्ध में भी बिना उन्हें प्रांखों से देखे हम पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं हो सकते। प्राचीन काल में यात्रा की सुविधाएं आज जैसी नहीं थीं। न तो रेल, मोटर और विमान जैसे द्रुतगामी वाहन थे और न आजकल की – सी सुरक्षा थी। यात्रा में समय बहुत लगता था। रास्ते में चोरों, डाकुओं का भय रहता था।

फिर भी मार्को पोलो, फाहियान हन्सांग और अलबेरूनी जैसे यात्री हजारों मील की यात्रा करके देश – देश का भ्रमण करते रहे थे। इन यात्रियों के नाम आज इतिहास में अमर हैं, क्योंकि अपने समय में दूर देशों की जानकारी सबसे पहले उन्होंने ही दूसरे लोगों को दी थी। आज जब हमें सब सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो कोई कारण नहीं कि हम क्यों विभिन्न स्थानों और वस्तुओं को अपनी आंखों से न देखें।

केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक भटकते रहना यात्रा नहीं कही जा सकती। यात्रा करते समय पहले मनुष्य के मन में कोई स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि वह किस प्रयोजन से यात्रा कर रहा है। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति प्राचीन ऐतिहासिक स्थानों के दर्शन के लिए यात्रा कर सकता है।

दूसरा व्यक्ति विभिन्न वनस्पत्तियों की खोज के लिए यात्रा कर सकता है ; तीसरा व्यक्ति देश के विभिन्न स्थानों के प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन के लिए यात्रा पर निकल सकता है। चाहे जो भी हो, किन्तु कुछ न कुछ लक्ष्य पर्यटक के मन में अवश्य रहना चाहिए। जो व्यक्ति एक ही स्थान में रहता है और यात्रा नहीं करता, वह कूपमंडूक बना रहता है।

एक ही प्रकार की शान्त परिस्थिति में वह जीवन बिताता जाता है। नई – नई परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको डालते जाने की क्षमता उसमें नहीं आती। नये लोगों से व्यवहार करते उसे संकोच होता है, परन्तु जब व्यक्ति यात्रा पर निकलता है, तो उसके सामने नई – नई परिस्थितियां आती हैं। उनमें से सफलतापूर्वक गुजरने के बाद उसके मन में आत्मविश्वास उत्पन्न हो जाता है।

उसके हृदय का भय और संकोच समाप्त हो जाता है। यात्रा करते समय मनुष्य को पाने खोलकर चलना चाहिए ; अर्थात् उसे अपने आसपास की परिस्थितियों को भली – भांति देखना, समझना और हृदयंगम कर लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी नगर में जाकर वहां के निवासियों की वेशभूषा को, खानपान, रहन – सहन और रीति – रिवाजों को ध्यान से नहीं देखता और लौट कर उनका ठीक – ठीक वर्णन नहीं कर सकता, तो उसकी यात्रा व्यर्थ रही। वह उस यात्रा के बिना भी जी सकता था।

इसलिए यात्रा करते समय प्राकृतिक दृश्यों, निवासियों के रहन – सहन, कला – कौशल और रीति – रिवाज इत्यादि पर यात्री को पूरी दृष्टि रखनी चाहिए। यात्रा से एक बड़ा लाभ यह होता है कि हमारा मन उदार हो जाता है। जो लोग यात्रा नहीं करते और एक ही स्थान में पड़े रहते हैं, उनके दृष्टिकोण संकुचित हो जाते हैं। उनकी विचारधारा बहुत संकीर्ण होती है।

वे समझते हैं कि जो कुछ हम करते हैं, बस वही ठीक है, उससे भिन्न संसार में कहीं कुछ नहीं होना चाहिए। अगर कुछ होता है, तो वह गलत है। परन्तु पर्यटक के मन में ऐसी कट्टरता नहीं रहती। यह नये – नये देशों को देखता है। उनके अलग – अलग रीति – रिवाजों को देखता है और समझ लेता है कि अमुकै स्थान पर अमुक बात ठीक मानी जाती है और किसी दूसरे स्थान पर दूसरी ; इसलिए दोनों ही बातें ठीक है। ऐसा उदार दृष्टिकोण मनुष्य के जीवन को सुखी और सन्तुष्ट बनाता है।

यात्रा स्वास्थ्य – सुधार के लिए भी बहुत लाभदायक समझी जाती है। एक ही प्रकार के जलवायु में देर तक रहने से स्वास्थ्य क्षीण हो चलता है। उस समय चिकित्सक लोग भी रोगियों को जलवायु – परिवर्तन की सलाह देते हैं। यदि व्यक्ति समय – समय पर बों यात्रा करता रहे, तो शायद उसके रोगी होने का अवसर ही न आए। यात्रा से मनुष्य व्यापारिक लाभ भी उठा सकता है।

उसे यह पता चल जाता है कि कहां कौन – सौ वस्तुएं पैदा होती हैं और सस्ती मिलती हैं और कहां उन वस्तुओं की मांग अधिक है और वे महंगी विक सकती हैं। इस प्रकार सस्ती जगह से खरीदकर महंगी जगह बेचकर वह सरलता से साभ पा सकता है। किन्तु इन सबसे बढ़कर बड़ा लाभ यह होता है कि विभिन्न देशों के रीति रिवाज और रहन – सहन की तुलना करके व्यक्ति बुराइयों को छोड़ सकता है और अच्छाइयों को अपना सकता है। किसी भी व्यक्ति या जाति की उन्नति के लिए यही एक मूल मन्त्र है।

दूसरे देशों या जातियों के सम्पर्क में पाकर हम उनसे अपनी तुलना कर सकते हैं। यदि हम उनसे अच्छे हैं, तो हम उनपर अपना प्रभाव जमा सकते हैं और यदि हम उनसे पिछड़े हुए हैं तो हमारे मन में प्रतियोगिता की भावना उत्पन्न होती है और हम आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।

दूर – दूर तक घूम – फिरे व्यक्ति का सब जगह आदर होता है, न केवल इसलिए कि वह किसी भी समाज में बैठकर अपनी यात्राओं के वर्णन सुनाकर लोगों का घंटों मनोरंजन कर सकता है, अपितु इसलिए भी कि दूर देशों की यात्रा करके उसका ज्ञान इतना बढ़ जाता है और उसका व्यक्तित्व इतना निखर जाता है कि लोग स्वभावतः उसका सम्मान करते हैं और यह पाया करते हैं कि उसके सम्पर्क में आकर वे उससे कुछ अच्छी और उपयोगी बातें सीख सकेंगे।

इसलिए यात्रा को शिक्षा का एक प्रावश्यक अंग समझा जाना चाहिए। बिना सामयिक लम्बी यात्राओं के केवल किताबी शिक्षा पूरी शिक्षा नहीं समझी जा सकती। इस बात को शिक्षाशास्त्रियों ने अनुभव कर लिया है और आजकल छात्रों के लिए समय – समय पर यात्रा करने की विशेष सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। विद्यालयों की ओर से यात्राओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें होने वाले खर्च का कुछ भाग सरकार भी वहन करती है।

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